वसंत पंचमी पर गणेश पूजन के साथ भगवान श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि घोषित कर दी गई है। मेष राशि लगन के अनुसार मंदिर के कपाट 26 अप्रैल 2015 को सुबह 5-15 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खोले जाएंगे। भगवान बदरीविशाल के महाभिषेक के लिए तिल का तेल नौ अप्रैल को निकाला जाएगा।
नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में शनिवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने गणेश, पंचांग और चौकी पूजन के बाद महाराजा मनुज्येंद्र शाह की जन्म कुंडली का अध्ययन और ग्रह नक्षत्रों की दशा देखकर भगवान श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोलने की तिथि घोषित की।
भगवान बदरीविशाल के महाभिषेक के लिए सुहागिन महिलाएं नौ अप्रैल को राजदरबार में तिलों का तेल निकालेंगी। उसके बाद गाडू-घड़ा यात्रा को लेकर डिम्मर पंचायत के लोग अपने गंतव्य को प्रस्थान करेंगे।
धार्मिक यात्रा में राजनीति पर ऐतराज
इस बीच यात्रा ऋषिकेश, श्रीनगर, पांडुकेश्वर आदि विभिन्न स्थानों पर रुकने के बाद 25 अप्रैल को बदरी विशाल के मंदिर में पहुंचेगी। 26 अप्रैल को तिल के तेल से बदरीविशाल के महाभिषेक के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस मौके पर महाराजा मानुज्येंद्र शाह, महारानी व टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, बदरीकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष व विधायक गणेश गोदियाल, बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी नारायण आदि मौजूद थे।
बोले मनुज्येंद्र शाह
शीतकालीन यात्रा शुरू कराना परंपरा से खिलवाड़ है। मंदिर के कार्यों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। चारधाम यात्रा ग्रीष्मकालीन समय पर ही होनी चाहिए। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जाए तो लोग स्वयं ही अधिक से अधिक संख्या में चारधाम यात्रा पर आएंगे।
-महाराजा मनुज्येंद्र शाह।
चारधाम यात्रा को सफल बनाने के लिए मंदिर समिति और प्रदेश सरकार कृत संकल्प है। पिछले वर्र्ष तक केदारनाथ में जहां 500 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था थी, उसको बढ़ाकर 1500 किया गया है। मंदिर समिति, प्रदेश सरकार और निम ने कड़ी मेहनत कर वहां सुविधाएं बहाल की है। केदारनाथ में श्रीमद्भागवत कथा कराने के लिए अभी तक विभिन्न क्षेत्रों से 30 आवेदन मिले हैं। यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
-गणेश गोदियाल, अध्यक्ष बीकेटीसी।