तिलपात्र के दौरान ये होंगी प्रक्रियाएं
13 जुलाई को सबसे पहले नवनियुक्त रावल का मुंडन किया जाएगा। उसके बाद जनेऊ बदला जाएगा। फिर वे बदरीनाथ धाम में स्थित पंच धाराओं कुर्मधारा, प्रह्लाद धारा, इंद्र धारा, उर्वशी और भृगु धारा में स्नान करेंगे। स्नान के बाद रावल बदरीनाथ मंदिर में आएंगे। मंदिर में धर्माधिकारी और वेदपाठी वैदिक मंत्रोचार के साथ तिलपात्र की प्रक्रियाएं संपन्न कराएंगे। सभी प्रक्रियाओं को करने के बाद हवन किया जाएगा।
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अगले दिन 14 जुलाई को सुबह वर्तमान रावल भगवान बदरीविशाल का अभिषेक करेंगे और बालभोग लगाएंगे। इस प्रक्रिया में नए रावल भी मौजूद रहेंगे। बालभोग के बाद वर्तमान रावल नए रावल को पाठ, मंत्र व गुरुमंत्र (मंदिर में होने वाली पूजाएं, मंत्र आदि) देंगे जिसके बाद नए रावल अपने निवास पर चले जाएंगे। 14 जुलाई को शयनकालीन पूजा करने के लिए नए रावल छड़ी के साथ मंदिर में प्रवेश करेंगे और बदरीनाथ में होने वाली सभी पूजाएं शुरू करेंगे। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि वर्तमान रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का 2014 में तिलपात्र उन्होंने ही संपन्न कराया था।