सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें पद से जबरन हटाए जाने के लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते का समय दिया है। उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने राज्यपाल पद से हटाए जाने के लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अर्जी दी थी।
जिस पर संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हुई। बता दें कि डॉ. अजीज कुरैशी पर लगातार उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने का दबाब बनाया जा रहा है। लेकिन अजीज कुरैशी अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं है।
इस सिलसिले में अब राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है राज्यपाल को पद से हटाने का अधिकार केवल देश के राष्ट्रपति के पास होता है।
इस्तीफे के दबाव का ताल्लुक यूपी से
जिन बयानों को लेकर डॉ. अजीज कुरैशी पर इस्तीफे का दबाव है उसका सीधा ताल्लुक यूपी से है।
यूपी में बतौर राज्यपाल तीस दिन का उनका कार्यकाल विवादों और उनके बयानों के कारण हमेशा याद रहेगा। डॉ. कुरैशी करीब सवा दो साल से उत्तराखंड के राज्यपाल हैं।
इस दौरान न तो उनकी प्रदेश सरकार से किसी मुद्दे को लेकर खींचतान हुई है और न ही उनके किसी बयान से तूफान उठा। इस दौरान कांग्रेस सरकार के दो मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा और हरीश रावत के साथ उनके रिश्ते भी बेहतर रहे हैं।
राज्यपाल को अपना काम करने की नसीहत दे डाली
लखनऊ में राज्यपाल की शपथ के तुरंत बाद आया डॉ. कुरैशी का बयान यूपी की राजनीति में गरमी ले आया था।
राज्यपाल ने दो घंटे जनता दरबार लगाने की बात कह प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार से सीधा मोर्चा खोला। जिस पर वहां मंत्री शिवपाल यादव और वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने राज्यपाल को अपना काम करने की नसीहत दे डाली थी।
डॉ. कुरैशी ने अल्प कार्यकाल में यूपी के मंत्री आजम खां के पिता के नाम पर चल रही मोहम्मद अली गौहर यूनिवर्सिटी की सालों से लंबित अल्पसंख्यक वर्ग की मान्यता फाइल पर मुहर लगा दी।
जबकि इस मामले उसने पूर्व दो राज्यपालों टीवी. राजेश्वर और बीएल. जोशी ने भी रोककर रखा था।
पूर्व राज्यपालों के खिलाफ बयानबाजी
इतना ही नहीं मान्यता पर हस्ताक्षर करने के बाद डॉ. कुरैशी ने पूर्व राज्यपालों के खिलाफ भी बयानबाजी की। उन्होंने कहा कि किसी ने गलत किया है तो क्या मैं भी उनके नक्शे कदम पर चलूं।
लखनऊ से लौटने के कुछ दिनों पूर्व उन्होंने निर्देश जारी किए प्रदेश सरकार के सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्र लगाया जाए।
हालांकि यह व्यवस्था प्रोटोकॉल के तहत प्रत्येक प्रदेश में होती है बावजूद डॉ. कुरैशी के बयान ने इसे भी राजनीतिक रंग दिया।