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सांसद पर हमलाः सुरक्षा में दिखी भारी चूक

Sat, 21 May 2016 05:35 AM IST
मुकेश जुयाल/अमर उजाला, विकासनगर

सार

  • अनुष्ठान को प्रशासन ने हल्के में लिया, सुरक्षा के नाम पर थे चंद पुलिस कर्मी  
  • सांसद को लेकर भी नहीं दिखाई गंभीरता, खुफिया के अलर्ट पर भी नहीं चेते 
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सांसद पर हमला करने को आक्रोशित भीड़ - फोटो : AmarUjala
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विस्तार
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चकराता प्रखंड के पोखरी गांव में हुए धार्मिक अनुष्ठान में सांसद पर हमले के मामले में सुरक्षा में भारी चूक सामने आई है। खुफिया विभाग के आला अधिकारियों को आगाह करने के बावजूद समारोह के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए गए। इसके अलावा पहले हुई घटनाओं से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। धार्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, लेकिन वहां सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं था।
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पूरी व्यवस्था संसाधनविहीन राजस्व पुलिस के कंधों पर थी। ऐहतियात के तौर वहां सिर्फ सिविल पुलिस की ओर से थानाध्यक्ष कालसी हरिओम राज चौहान समेत दो दारोगा और दो सिपाही तैनात थे। भीड़ के हमले से सिविल पुलिस के जवानों ने ही किसी तरह सांसद को सुरक्षित निकाला।

जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था राजस्व पुलिस के अधीन है। चकराता छावनी क्षेत्र के साथ ही कालसी थाना क्षेत्र के अधीन सात गांवों को छोड़ कर पूरी सुरक्षा व्यवस्था राजस्व पुलिस के कंधों पर है। शुक्रवार को चकराता प्रखंड के पोखरी गांव में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में जौनसार बावर परिवर्तन यात्रा के तहत सांसद अनुष्ठान में शामिल होने गए थे। उनके साथ आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के संरक्षण दौलत कुंवर भी थी। उनके साथ दलितों को भी देव दर्शन करने थे।
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बेकाबू थी भीड़, भाग खड़ी हुई राजस्व और सिविल पुलिस

तरुण विजय - फोटो : AmarUjala
शासन प्रशासन को इसकी पहले से जानकारी थी। इसके बावजूद सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। भीड़ के पथराव करने पर राजस्व पुलिस और सिविल पुलिस के जवान इधर-उधर भाग खड़े हुए। थानाध्यक्ष कालसी हरिओम राज चौहान ने किसी तरह स्थिति को संभाला। सांसद और उनके साथियों को वाहन में बैठा कर चकराता रवाना किया।

बेकाबू भीड़ ने पुलिस के वाहन पर पथराव के साथ ही सांसद के वाहन को भी खाई में धकेल दिया। सांसद के साथ घायल हुए भाजपा नेता विपुल अग्रवाल ने फोन पर अमर उजाला संवाददाता को बताया कि लोगों ने वाहन का पीछा भी किया। वे किसी तरह भीड़ के चंगुल से जान बचाकर भागे।

वह सांसद के साथ वाहन से किसी तरह एडीबी के हॉटमिक्स प्लांट तक पहुंचे। यहां से आगे का सफर उन्होंने डंपर पर किया। चकराता के निकट पहुंचने पर 108 एंबुलेंस से वह चकराता स्थित सेना के अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस पुलिस कर्मी अगर हवाई फायरिंग करते तो भीड़ काबू में आ जाती।
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रेग्युलर पुलिस होती तो न होती यह घटना 

सांसद के सिर में गंभीर चोट आई हैं। - फोटो : AmarUjala
सांसद तरुण विजय पर जिस जगह हमला हुआ, वह क्षेत्र राजस्व पुलिस के अधीन आता है। यदि यह क्षेत्र रेग्युलर पुलिस के अधीन होता तो इस क्षेत्र को शर्मसार करने वाली यह घटना नहीं होती है ऐसा लोगों का मानना है। रेग्युलर पुलिस काफी हद तक ऐसे मामले सुलझाने में सक्षम होती है और भीड़ को काबू करने में भी उसे महारत हासिल होती है।

भाजपा के पछवादून अध्यक्ष संजय गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोमी बजाज, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष मूरत राम शर्मा, मंडल अध्यक्ष कालसी रितेश कुमार आदि ने कहा कि यदि क्षेत्र रेग्युलर पुलिस के हवाले होता तो अनुष्ठान में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होते। जरूरत पर पीएसी के भी जवान तैनात रहते। जरूरत पड़ने पर तैयारी के साथ आई पुलिस हवाई फायरिंग कर स्थिति पर आसानी से काबू पा सकती थी। 

त्यूनी थाने की मांग ने जोर पकड़ा 
सांसद पर हमले के बाद से भाजपा के तेवर तल्ख हैं। भाजपाइयों ने क्षेत्र में रेग्युलर पुलिस की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया है। इसके अलावा त्यूनी क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना के बाद से त्यूनी थाने की मांग को लेकर भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इन लोगों का कहना है कि वर्ष 1998 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के शासन काल में त्यूनी में थाना स्वीकृत किया गया, तब राजनीतिक दबाव में थाना निरस्त कर दिया। वहीं हाल ही में राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने त्यूनी में थाना खोलने का आदेश जारी किया। इसका नोटिफिकेशन भी हुआ, लेकिन क्षेत्र के राजनेताओं के दबाव में आदेश को वापस ले लिया गया।
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