गणेश चतुर्थी के लिए मूर्ति तैयार करती कलाकार। अमर उजाला
गणेश चतुर्थी को लेकर इस बार दून में मूर्ति बनाने वाले कारीगरों में गजब का उत्साह है। वह मिट्टी से भगवान गणेश को भव्य स्वरूप देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि इस काम में उनके परिवार की महिलाएं भी साथ देतीं हैं। मूर्तियों को रंगों से सजाना, उन्हें पगड़ी पहनाना आदि कार्य महिलाएं ही करती हैं।
दून में पिछले 20 साल से भगवान गणेश की मूर्तियों को भव्य रूप दे रहे राजस्थान के कारीगरों की कला लोगों को खूब भा रही है। उनके द्वारा बनाई गईं विघ्नहर्ता गणेश की पगड़ी वाली भव्य मूर्तियों को लोग जमकर खरीद रहे हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र व कोलकाता से आईं मूर्तियों को भी कारीगर अपनी कला से और भी सुंदर बना रहे हैं। मूर्तियों की भव्यता की वजह से मुख्य बाजार से ज्यादा बल्लीवाला सड़क किनारे बैठे इन कारीगरों के पास लोगों की ज्यादा भीड़ रहती है। गणपति के अलग-अलग स्वरूपों को कारीगरों ने अपने हाथों से भव्यता दी है।
बल्लूपुर में तीन पीड़ियों से मूर्तियों का कारोबार करने वाले प्रजापति परिवार ने बताया कि पुरुष कारीगर मूर्तियों को स्वरूप देते हैं। जबकि, महिलाएं इन्हें रंगों से सजाकर भव्यता प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि बीते साल कोरोना के कारण कारीगरों को भी संकट से गुजरना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्हें उम्मीद है कि विघ्नहर्ता उनके भी संकट दूर करेंगे।
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100 रुपये से लेकर 10 हजार तक की मूर्तियां
राजस्थान के कारीगर लक्ष्मण सोलंकी, 70 वर्षीय धनकी देवी और 38 वर्षीय सीता ने बताया कि उनके पास 100 रुपये लेकर 1700 रुपये तक की मूर्तियां है। जबकि 22 वर्षीय हेमंत प्रजापति और अनमोल प्रजापति ने बताया कि उनके पास 150 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की गणपति की मूर्तियां हैं। बताया कि 10 हजार वाली दो मूर्तियां महाराष्ट्र से लाई गई थीं, जो कुछ दिन पहले ही बिक गईं। उन्होंने बताया कि इस बार बड़ी मूर्तियां बहुत कम ही बनाई हैं।