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साथ बैठने को तैयार हुई सरकार और सेना

Sat, 16 Jan 2016 07:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सेना और सरकार की रणनीति में यदि कोई बड़ी अड़चन नहीं आई तो मार्च में राजधानी में सीएमएलसी आयोजित हो सकती है। शुक्रवार को उत्तराखंड सब एरिया के जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल एस सभरवाल ने यह बात कही। अमर उजाला ने 12 जनवरी के अंक में ‘सेना से समन्वय बनाने को सरकार तैयार नहीं’ खबर प्रकाशित की थी। सेना जल्द ही दो कदम आगे बढ़कर सरकार से तालमेल बनाएगी।
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शुक्रवार को आर्मी डे के मौके पर आयोजित मीडिया इंटरेक्शन में जीओसी जनरल सबरवाल ने कहा कि सेना और सिविल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए सब एरिया मुख्यालय प्रतिबद्ध है। सीएमएलसी आयोजित होने में कुछ देरी जरूर हुई है, लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि आगामी मार्च में सीएमएलसी आयोजित कर सैन्य प्रबंधन व राज्य सरकार आमने-सामने बैठकर मुद्दों का हल निकालें।

इन मुद्दों पर होनी है चर्चा
सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य संरचनात्मक ढांचे का विस्तार करना व पूर्व सैनिकों के वेलफेयर के लिए बेहतर कदम उठाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होनी है। सीएमएलसी से पहले अन्य विषयों पर चर्चा कर उनका समाधान सिविल प्रशासन के साथ मिलकर निकाला जाना है।
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छावनी एरिया से सटे इलाकों में सिविलियन आबादी के साथ सेना के जवानों द्वारा किये जाने वाले दुर्व्यहार के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले को तूल दिया जाता है। आर्मी डे पर जीओसी मेजर जनरल सभरवाल ने कहा कि सेना का हर अधिकारी व जवान देश की रक्षा के लिए समर्पित है। इस मौके पर डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर विनीत सूद, कर्नल एसके गोस्वामी, कर्नल मैनी समेत सब एरिया मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि बीते 15 वर्षों में केवल दो बार ही वार्षिक सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस(सीएमएलसी) का आयोजन हो पाया है। अमर उजाला ने 12 जनवरी के अंक में इस संबंध में समाचार प्रकाशित किया था।

यह हैं प्रमुख मुद्दे
आर्टिलरी के लिए फ ील्ड फ ायरिंग रेंज की स्थापना। सैन्य पड़ाव भूमि को राज्य सरकार को सौंपकर बदले में अन्यत्र भूमि देना। सेना को खनन और स्टोन क्रशर के लिए लाइसेंस। सीएडी कैंटीनों में जीएसटी (गुड एंड सर्विस टैक्स) में राहत। आईएमए के सामने अंडरपास बनाने की योजना। क्लमेंटटाउन के राजस्व रिकार्ड में बदलाव। कैंट में वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने में सहयोग। सीवरेज सिस्टम में दोनों कैंट क्षेत्र शामिल करना। देहरादून, रायवाला और जोशीमठ में भूमि की मांग।
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