अर्द्धकुंभ 2016 के मद्देनजर अफसरों की पोस्टिंग के लिए शासन स्तर पर होमवर्क शुरू हो गया है। करीब एक वर्ष पहले ही अफसरों को तैनाती देनी होगी।
सचिव स्तर के अफसर को बनाया जाएगा मेलाधिकारी
क्योंकि इसी समय कुंभ क्षेत्र को अलग जिले के रूप में अधिसूचित करना होगा। इसी के साथ यह कार्यवाही भी हो जाएगी।
हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2016 के लिए अभी सरकार को यह तय करना है कि मेलाधिकारी सचिव रैंक का होगा या फिर वरिष्ठ अपर सचिव स्तर के किसी अफसर को मौका मिलेगा।
शीर्ष नौकरशाही चाहती है कि शासन में तैनात सचिव आरके सुधांशु को गढ़वाल कमिश्नर के साथ ही मेलाधिकारी बनाया जाए। जाहिर है कि जो मेलाधिकारी होगा वही हरिद्वार विकास प्राधिकरण का वीसी भी होगा। वैसे भी सुधांशु ढाई साल से ज्यादा समय तक हरिद्वार के डीएम भी रहे है।
केवल खुराना का नाम भी
तेजी के साथ निर्णय लेना सुधांशु का प्लस प्वाइंट है। यदि किसी अपर सचिव स्तर के अफसर को मेलाधिकारी बनाया जाता है तो दिलीप जावलकर व रविनाथ रमन के नाम पर भी चर्चा हुई है। नैनीताल के डीएम अक्षत गुप्ता का नाम भी आगे आया है। लेकिन हरिद्वार के डीएम डी.सेंथिल पांडियन ने डीएम केसाथ ही मेलाधिकारी का चार्ज लेने के लिए जोर लगा रखा है।
बड़े सत्ता प्रतिष्ठान से सेंथिल की पैरवी भी की जा रही है। इसी तरह से मेला पुलिस अधिकारी के लिए भी जोर आजमाइश शुरू हो गई है। सदानंद दाते का भी नाम है। लेकिन उन्हें सरकार ने हरिद्वार से जिस तरह सात महीने में ही हटा दिया है, उससे मुश्किल लगता है।
और दाते को फिर नैनीताल ले जाने के लिए मंत्री इंदिरा ह्दयेश ने सिफारिश ला रखी है। इसी के साथ एक विकल्प नैनीताल की एसएसपी विम्मी सचदेवा को मेला पुलिस अधिकारी बनाने का भी है। लेकिन साधु संतों और अखाड़ों की राजनीति के मद्देनजर सरकार महिला अफसर को आगे करने में संकोच कर रही है।
बीच में केवल खुराना का नाम भी आ रहा है। क्योंकि वह हरिद्वार के एसएसपी रह चुके है। कुछ और भी नाम सामने आ रहे हैं। और, यदि मेला अधिकारी सचिव रैंक के अफसर को बनाया तो मेला पुलिस अधिकारी के रूप में अजय रौतेला का नाम सबसे ऊपर है। क्योंकि वह भी जनवरी में डीआईजी हो जाएंगे।