उत्तराखंड के वार्षिक प्लान और स्पेशल असिस्टेंस में इस बार कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी। इससे राज्य का नुकसान होने का अंदेशा है। क्योंकि प्लान में बढ़ोत्तरी नहीं होने के कारण राज्य अपनी नई योजनाएं नहीं ला सकेगा।
इस बार वार्षिक प्लान में कोई इजाफा नहीं
केंद्र ने आपदा संबंधित पुनर्निर्माण के लिए दी जाने वाली धनराशि को भी प्लान में ही एडजस्ट करने की हिदायत दी है।
पिछले वर्ष 8500 करोड़ का वार्षिक प्लान केंद्र ने मंजूर किया था। लेकिन इस बार कोई इजाफा नहीं।
केंद्रीय योजना आयोग की सचिव सिंधुश्री खुल्लर ने 26 अगस्त 2014 को राज्य सरकार को चिट्ठी भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि 2014-15 के वार्षिक प्लान के लिए दिल्ली आकर प्रस्तुतीकरण देने की जरूरत नहीं है और राज्य की इस बार वार्षिक योजना व स्पेशल असिस्टेंस में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी।
अभी तक हर वर्ष इसमें दस प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि होती थी। लेकिन इस बार राज्य को अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा। आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सीधे दी जाने वाली धनराशि को भी इस साल के बजट में शामिल करने को कहा है। स्पेशल असिसटेंस के रूप में भी बढ़ोत्तरी नहीं होगी।
पिछले वर्ष की तर्ज पर इस बार भी नॉरमल सेंट्रल असिसटेंस के रूप में 1529.43 करोड़, स्पेशल सेट्रल असिसटेंस केरूप में 700 करोड़, स्पेशल असिसटेंस प्लान के लिए 845 करोड़, रेगूलर एसपीए केलिए 350 करोड़ और मीडियम लांग टर्म रिकंस्ट्रक्शन पैकेज के रूप में 495 करोड़ रुपए ही दिए जाएंगे। अब शासन में वार्षिक प्लान का डोक्यूमेंट भेजने की तैयारी चल रही है।
व्यवस्था बदलने से पैदा हुआ कन्फ्यूजन
केंद्र की पिछली यूपीए सरकार ने देश भर में संचालित 150 योजनाओं का एकीकरण करके 66 कर दी थी। अब समस्या यह है कि कुछ विभाग पिछली योजनाओं की तर्ज पर ही प्लान तैयार कर रहे है जो कि केंद्र में मान्य नहीं होगा।
इसलिए बार बार मुख्य सचिव स्तर से भी कहा जा रहा है कि 66 योजनाओं का प्लान तैयार करे। लेकिन यूपीए की पिछली सरकार ने कौन सी योजना बंद की और कौनसी योजना किसमें मर्ज की इसे लेकर अभी तक भ्रम की स्थिति है। इससे प्लान तैयार करने में कठिनाई हो रही है।
केंद्र की चिट्ठी मिली है। इस बार राज्य के वार्षिक प्लान में कोई बढ़ोत्तरी नहीं है। पिछला वार्षिक प्लान ही इस वर्ष भी रहेगा। इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय योजना आयोग के सचिव को भेजी जाएगी, इसके बाद यदि केंद्र को जरूरत होगी तो वह बुलाकर बात कर सकता है।
- सुभाष कुमार, मुख्य सचिव, उत्तराखंड