उत्तराखंड के कर्णप्रयाग विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष एकेमैखुरी ने हर वर्ष नंदा राजजात आयोजन की मांग की है। हालांकि इसमें एक नया विवाद के पनपने की पूरी गुंजाइश है। मैखुरी का कहना है कि हर वर्ष वेदनी बुग्याल तक नंदा की जात होती है। इस को धार्मिक पर्यटन का स्वरूप देने के लिए सरकार को जीएमवीएन को नोडल एजेंसी बनाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पनपेगा।
नौटी को खासा महत्व
दरअसल कुरुड़ से ही नंदा हर साल जात के लिए निकलती है। यात्रा केहर पड़ाव पर मेले लगते हैं और कई गांवों के लोग इसमें शामिल होते हैं। नंदा की डोली विभिन्न गांवों से होते हुए वेदनी बुग्याल तक पहुंचती है। इस बार की राजजात में कुरुड़ के लोगों की शिकायत भी थी कि नौटी को खासा महत्व दिया गया जबकि जिसकी वजह से जात होती है उस गांव को भुला ही दिया गया।
इसी आधार पर मैखुरी ने भी हर साल जात के आयोजन की मांग की है। मैखुरी इस बार जात में शामिल रहे और होमकुंड तक भी गए थे। फर्क इतना है कि हर साल की जात में नौटी की भूमिका लगभग न के बराबर होती है। मैखुरी हर साल की जात को नौटी से लेकर होमकुंड तक संचालित करने की बात कह रहे हैं।
जाहिर है कि नौटी को हर साल की जात में शामिल करने से नया विवाद उठ खड़ा हो सकता है। कुरुड़ के लोग मैखुरी की इस मांग से असहमति जता रहे हैं। इनका कहना है कि हर साल की जात को अगर बड़े पैमाने पर ही आयोजित किया जाना है तो पारंपरिक पड़ावों को ही महत्व मिलना चाहिए।