भारतीय सेना की ओर से चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की ओर से बुधवार को दो पालियों में मिलिट्री नर्सिंग एग्जाम बीएससी नर्सिंग (एमएनएस) प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया था, लेकिन जोगीवाला के बद्रीपुर में बने सेंटर में सुबह से ही सर्वर ठप होने से प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाए। इससे गुस्साए अभ्यर्थियों व उनके अभिभावकों ने परीक्षा केंद्र पर हंगामा किया।
दो पालियों में होने वाली कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीई) के लिए तय समय से पहले ही प्रदेशभर से अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र पहुंचे थे, लेकिन सुबह 11 बजे की पहली पाली और दोपहर तीन बजे की दूसरी पाली में भी अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाए। इससे गुस्साए अभिभावकों ने परीक्षा केंद्र पर प्रदर्शन किया, साथ ही परीक्षा से छूटे अभ्यर्थियों के लिए फिर से परीक्षा कराने की मांग की। मामला बिगड़ता देख मौके पर पहुंची पुलिस ने अभिभावकों और परीक्षा केंद्र के अधिकारियों से बात कर 40-40 कर अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए बैठाया।
हालांकि, अभिभावकों का आरोप है कि यह व्यवस्था केवल मामले को दबाने के लिए की गई है। उधर, इस मामले में परीक्षा केंद्र में मौजूद एक अधिकारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि सर्वर ठप है। सर्वर ठीक होने के बाद सभी बच्चों की परीक्षा कराई जाएगी।
500 अभ्यर्थियों के लिए बनाई सिर्फ 40 सीट की व्यवस्था
अभिभावकों ने बताया कि परीक्षा केंद्र में केवल 40 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। जबकि, प्रदेशभर से करीब 500 अभ्यर्थी परीक्षा देने के लिए पहुंचे थे। इसके चलते दिनभर परीक्षा केंद्र के बाहर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
बातचीत
सुबह की पाली में बेटी की परीक्षा थी, लेकिन परीक्षा केंद्र पर मौजूद कर्मचारी ने सर्वर ठप है कह कर केंद्र में प्रवेश नहीं करने दिया। घंटों बारिश में खड़े होकर इंतजार करने के बाद भी सर्वर चालू न होने से बेटी परीक्षा नहीं दे पाई। आने जाने में ही करीब 10 हजार रुपये का खर्चा हो गया। यहां रहने और खाने की भी व्यवस्था नहीं है। - बलवंत, बागेश्वर
सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भी बहन परीक्षा नहीं हो पाई। लगातार हो रही बारिश ने समस्या दोगुनी कर दी थी। बावजूद इसके परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थियों को अंदर भी नहीं बैठाया गया। सुबह की पाली में कुछ बच्चों को अंदर बैठाया गया था, लेकिन उनकी भी परीक्षा नहीं हो पाई। - अमित, कोटद्वार निवासी
बरसात के मौसम में बड़ी मुश्किलों से बेटी को लेकर दून पहुंची थी, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी परीक्षा न होने से बेटी का मनोबल भी कम हो गया है। परीक्षा केंद्र पर फैली अव्यवस्थाओं से अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन हमारी सुध लेने कोई नहीं आया। - सूखा देवी, शिमला