- सहकारी समिति के सदस्य सेब उत्पादक अपने सेब का मोलभाव कर सकेंगे।
- सहकारी संघ उत्पादकों के सेब की ग्रेडिंग, ट्रासंपोर्टेशन, पैकिंग आदि की व्यवस्था करेगा।
- यह माडल कलेक्टिव कॉपरेटिव फार्मिंग का है। ऐसे में उत्पादकों को सेब की फसल को सुधारने में प्रशिक्षण, सामान आदि में सहायता मिलेगी। अगले एक साल में रूट स्टॉक विधि से करीब दो हजार बगीचे तैयार किए जाएंगे।
- प्रदेश में कुल तीस क्लस्टर तैयार होने हैं। इनमें देहरादून, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ आदि शामिल हैं।
पहचान कायम करेगा उत्तराखंड का सेब
हम चाहते हैं कि उत्तराखंड का सेब पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान कायम करे। यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और इससे सेब उत्पादकों को निश्चित रूप से फायदा होगा।
- डा.धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री