प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा का हरिद्वार के किसान नेताओं ने स्वागत किया है। भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष विजय कुमार शास्त्री ने कहा कि एक साल के लंबे संघर्ष के बाद सरकार जगी है। उन्होंने कहा यह हमारी पहली जीत है।
उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि जब तक सरकार संसद में इस बिल को पास नहीं करती, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे नेताओं का कोई आदेश नहीं आता, तब तक धरना जारी रहेगा। जिला अध्यक्ष ने कहा कि किसान एक साल से सर्दी, धूप और बरसात में अपने हक के लिए सड़क पर पड़ा है। लेकिन सरकार नहीं चेती।
किसान आंदोलन में सैकड़ों शहादतें हो चुकी है। आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों ने अपनी शहादत दी है। जिसे भुलाया नहीं जा सकता। किसानों की शहादत पर ही यह जीत मिली है। जिले के किसानों ने प्रधानमंत्री की इस घोषणा का स्वागत किया है।
मोदी सरकार का फैसला काश्तकारों के हित में
लालढांग में मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर नेताओं व किसानों अपनी अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की। वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह लहरी ने कहा कि कृषि कानून के वापस होने का एलान देश के किसानों की बहुत बड़ी जीत है। मोदी ये काम पहले कर देते तो किसी किसान की शहादत न होती। राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया था कि आने वाले समय में सरकार को ये काले कानून वापस लेने पड़ेंगे।
किसान शैलेंद्र पाठक का कहना है कि मोदी सरकार का फैसला काश्तकारों के हित में है। काश्तकारों को अधिकार है कि अपनी फसल को कहीं भी उचित दामों पर बेचकर बिचौलियों से बच सके। ब्रजमोहन पोखरियाल रसूलपुर ने कहा कि सरकार को यह फैसला पहले ही ले लेना चाहिए था। विनोद कुमार नयागांव ने कहा कि किसानों को इसका फायदा मिलेगा, वह अपना अनाज कहीं भी खुले बाजार में बेच सकते हैं।
भाकपा के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी का कहना है कि यह देश के किसान आंदोलन की जीत है। देश का इतिहास यह याद रखेगा कि जिस समय इस देश के तमाम संसाधनों की हुकूमत द्वारा बोली लगाई जा रही थी, उस वक्त इस देश के किसानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर न केवल कृषि भूमि को कॉरपोरेट के शिकंजे में जाने से बचाया, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को बचाने के लिए भी अपना जीवन होम कर दिया।
कहा कि यह किसान आंदोलन, देश में अपने हक-अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों को प्रेरित करेगा कि बहुमत के मद में चूर सत्ता को झुकाने के लिए एकजुट आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। यह याद रखा जाना चाहिए कि इसी सरकार ने किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग खुदवा दिए, पानी की बौछारें कीं और लाठी-डंडे चलाए, किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी तक कहा।
आंदोलन में फूट डालने और हिंसा फैलाने के कुत्सित प्रयास किए। खुद प्रधानमंत्री ने आंदोलनजीवी कह कर उनका उपहास उड़ाया और जब इतने से भी मन नहीं भरा तो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे ने अपनी गाड़ी से किसानों को रौंद दिया। अभी भी केंद्र सरकार ने उस मंत्री को मंत्रिमंडल में बनाए रखा है। इतने सब के बावजूद यदि प्रधानमंत्री को कृषि बिलों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी है तो यह किसान आंदोलन की एकजुटता और उसके जहीन नेतृत्व के दम पर ही संभव हो पाया है, जिसने विपरीत से विपरीत परिस्थिति में संघर्ष की लौ को कमजोर नहीं पड़ने दिया।