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आपदा के 24 घंटे बीते, लापता लोगों का अब भी पता नहीं

Sun, 03 Jul 2016 04:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पिथौरागढ़ के बाद सोमेश्वर की लोद घाटी में बादल फटा, भारी तबाही
  • खोजबीन और पीड़ितों की सहायता को सरकार, राहत एजेंसियों ने झोंकी ताकत
  • केंद्र सरकार ने भेजी एनडीआरएफ की दो और बटालियन
  • मुख्यमंत्री ने की मंत्रियों के साथ आपात बैठक
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बस्तड़ी गांव में रेस्क्यू करते जवान - फोटो : अमरउजाला
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विस्तार
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कहीं तेज तो कहीं रुक-रुककर हो रही बरसात के बीच शनिवार को चमोली और पिथौरागढ़ के आपदाग्रस्त क्षेत्र के मलबों में से चार जनों के शव निकाले जा सके। इस तरह बादल फटने से हुई तबाही में मरने वालों की संख्या अब तक 15 हो गई है। मौसम की मार से राहत कार्य बार-बार प्रभावित होता रहा, नतीजतन अपना सब कुछ झोंक देने के बावजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, एसएसबी समेत दर्जन भर राहत एजेंसियां मिलकर भी शुक्रवार को लापता हुए 21 जनों को तलाश नहीं पाईं। कुशल यह रही कि शनिवार को मौसम ने शुक्रवार जैसा रौद्र रूप नहीं दिखाया, लिहाजा कहीं से भी बड़ी जनहानि की घटना का समाचार नहीं मिला।
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इधर, भारी तबाही के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राहत कार्यों की कमान खुद अपने हाथों में ले ली। उन्होंने शनिवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ आपात बैठक कर आपदा राहत कार्यों की समीक्षा की और अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए।

उन्होंने चारधाम यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए सभी आवश्यक कदम तत्काल उठाने के निर्देश दिए, ताकि आपदा का यात्रा पर कोई असर न पड़े।

हजारों लोगों के सामने खड़ा हुआ संकट

उत्तराखंड आपदा - फोटो : amar ujala
उल्लेखनीय है कि राज्य के पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में बृहस्पतिवार और शुक्रवार की रात सिंगाली, दाफीला, बस्तड़ी, डीडीहाट समेत कई स्थानों पर एकसाथ बादल फटने से भारी तबाही हुई। प्राकृतिक आपदा में जहां 15 लोगों की मौत हो चुकी हैं, वहीं 21 लोग अभी भी लापता है।

इसके अलावा प्राकृतिक आपदा के चलते बड़े पैमाने पर मवेशियों की मौतें होने के साथ ही सैकड़ों की संख्या में मकान जमींदोज हो गए हैं। दोनों जिलों में हजारों लोगों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
 
चमोली जनपद में शनिवार को भी जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। वहां शुक्रवार को मलबे में दबे छह लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घाट कस्बे के पुराने बाजार में एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम घूनी गांव के रामचंद्र और उनके पोते योगेश्वर प्रसाद की खोजबीन में लगी रही। जबकि जाखणी गांव में खोज-बचाव का काम शुरू ही नहीं हो पाया।
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जाखणी में चार दबे, 36 घंटे बाद भी नहीं शुरू हुई खोज

बदरीनाथ हाईवे भूस्खलन से अवरुद्ध - फोटो : अमरउजाला
जाखणी गांव में दो नेपाली मजदूर सहित चार लोग अब भी मलबे में दबे हैं। जनपद में शाम पांच बजे से रिमझिम बारिश भी शुरू हो गई है। इससे आपदा बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। शुक्रवार को सुबह पांच बजे जाखणी गांव के जेठी गदेरे में बादल फटने से छानियां बह गई थीं।

शनिवार को पांच बजे, 36 घंटे बाद भी जाखणी गांव में खोज-बचाव शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, सबसे महत्वपूर्ण बदरीनाथ हाईवे, घाट-नंदप्रयाग और चमोली-ऊखीमठ सड़कों के अवरुद्ध होने से गोपेश्वर, घाट, पीपलकोटी, जोशीमठ और पोखरी क्षेत्रों में शनिवार को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पाई। बदरीनाथ हाईवे को खोलने में भी बीआरओ को काफी मुश्किलें आ रही हैं।

Published By: Vivek Singh
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