दून के श्याम ठकुरी सहित कई ऐसे हैं, जो अभी तक भी अपने घर नहीं पहुंच पाए हैं। इससे पहले लगातार उनकी परिजनों से बात हो रही थी। जिससे परिजनों को इस बात का धैर्य था कि सभी सुरक्षित हैं। लेकिन अब तालिबानियों ने अफगानिस्तान में फोन और इंटरनेट सेवा बाधित कर दी है। जिससे वहां फंसे लोगों की परिजनों से बात नहीं हो पा रही है। अब परिजनों का धैर्य जबाब देने लगा है। वह लगातार उनसे बात करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बात नहीं हो पा रही है। जिससे उनका रो-रो कर बुरा हाल है। वह हर पल उनके फोन का इंतजार कर रहे हैं।
फंसे लोग बताए जा रहे हैं सुरक्षित
बताया जा रहा है कि जो लोग होटल और अन्य जगह फंसे हुए थे, उन्हें अमेरिकी सैनिकों की मदद से सुरक्षित एयरपोर्ट तक पहुंचा दिया गया है। वहां से उन्हें लाने के लिए फ्लाइट का इंतजार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में उनके भी वापस लौटने की संभावना है। हालांकि फोन न लगने से यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनकी लोकेशन कहां है। गज्लवाड़ी की प्रधान लीला शर्मा ने बताया कि उनके यहां से दो लोग अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। लेकिन एक दिन पहले उनकी अपने परिजनों से बात हुई थी। जो बता रहे थे कि वह एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं और जल्द ही यहां से निकल जाएंगे। फोन न लगने के कारण उन्होंने बाद में बात करने की बात कही है।
एयर पोर्ट को जा रही गाड़ी को रोक रहे स्थानीय लोग
यूरोपियन यूनियन में बतौर सुरक्षा गार्ड तैनात और शनिवार को सुरक्षित अपने घर लौटे नया गांव निवासी राजू थापा ने बताया कि अफगानिस्तान में अभी हालात बहुत खराब हैं। जो लोग एंबेसी और अच्छी कंपनियों में तैनात थे वह तो 14 और 15 को वहां से निकल गए थे, लेकिन कुछ लोग अभी भी वहां फंसे हुए हैं। क्योंकि उनकी कंपनियों के अधिकारी वहां से पहले ही भाग चुके हैं। वह या तो होटलों में हैं या कैंपों में।
अगर उन्हें लाने के लिए एयरपोर्ट से गाडियां भेजी जा रहीं हैं तो उन्हें स्थानीय लोग आने नहीं दे रहे हैं। वह गाड़ियों को रोक रहे हैं। वह उन्हें भी अपने साथ ले जाने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह एयरपोर्ट के बाद कुवैत, कतर और नेपाल के रास्ते छह दिन बाद अपने घर पहुंचे हैं। उसके साथ उनके ग्रुप के और लोग भी सुरक्षित पहुंचे हैं।