काले शीशे और परदे न होने से उत्तराखंड परिवहन निगम की एसी और वॉल्वो बसें ‘कूल’ नहीं हो पा रही हैं। इसके चलते यात्रियों और बस स्टाफ के बीच कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है।
वहीं बसों के ठंडा न होने का खामियाजा निगम के राजस्व पर भी पड़ रहा है। चालक-परिचालक इसकी शिकायत कई बार परिवहन निगम के अधिकारियों से से कर चुके हैं, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश (काली फिल्म चढ़ाने पर पाबंदी) के बाद सभी के हाथ बंधे हुए हैं।
यात्री बिफर पड़ते हैं
एयर कंडीशनर अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य कर सके, इसके लिए जरूरी है कि बस में काले शीशे या पर्दे हों। काले शीशों से सूरज की ‘अल्ट्रा वायलट किरणें’ अंदर नहीं आ पाती हैं। यही किरणें तापमान को बढ़ाती हैं।
वहीं बसों का आकार बढ़ा होता है, इसलिए उसमें लगे एसी को वाहन को ठंडा करने में वैसे ही ज्यादा समय लगता है। जबकि ऊर्जा (डीजल) की भी ज्यादा खपत होती है। उधर, एसी जब बसों को कूल नहीं करता तो यात्री बिफर पड़ते हैं।
यात्रियों का आरोप होता है कि जब एसी नहीं चलाना होता है तो उनसे इसका शुल्क क्यों लिया जाता है। (एसी व वॉल्वो) ‘ब’ डिपो के शाखा मंत्री परमजीत सिंह ने बताया यात्रियों को बहुत दिक्कत होती है। वह सीटें बदलने में लगे रहते हैं। काले शीशे और परदे हट जाने से बसें बिल्कुल भी ‘कूल’ नहीं हो पा रही हैं।
यात्री मिलें तो हम भी करें शुरू
उत्तराखंड परिवहन निगम भी दून से लखनऊ वॉल्वो बस सेवा शुरू कर सकता है। जीएम दीपक जैन ने बताया अगर यूपी परिवहन निगम की वॉल्वो को अच्छा रिस्पांस मिला तो उत्तराखंड भी सेवा शुरू कर सकता है।
हालांकि उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की वॉल्वो सेवा सफल नहीं हो पाती है। पहले भी यूपी की वॉल्वो संचालित होती थी। लेकिन यात्री नहीं मिले। लंबी दूरी के सफर के लिए लोग ट्रेन को ज्यादा महत्व देते हैं।
दिल्ली का किराया
वोल्वो से : 640 रुपये
एसी से : 439 रुपये
हां यह समस्या संज्ञान में है। लेकिन इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट का आदेश है।
-दीपक जैन, जीएम