उत्तराखंड के सेवायोजन के रिकार्ड को ही देखें तो 9,16,752 युवाओं को रोजगार की तलाश है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद युवाओं को रोजगार मुहैया कराने लिए समूह ग, प्रवक्ता, एलटी शिक्षक, प्राइमरी शिक्षक समेत विभिन्न वर्गों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां की गई हैं।
पंजीकृत बेरोजगार युवाओं को प्राइवेट कंपनियों में रोजगार मुहैया कराने के लिए सेवायोजन कार्यालयों की ओर से रोजगार मेले आयोजित किए जाते रहे हैं। बावजूद इसके बेरोजगारों की संख्या में कमी नहीं आ रही है।
सेवायोजन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में नवंबर तक पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 9,16,752 पहुंच चुकी है। इनमें सर्वाधिक 3,77,702 बेरोजगार इंटर पास हैं। हाईस्कूल से कम शैक्षिक योग्यता वाले 35110, हाईस्कूल पास 167016 , स्नातक 223236 और परास्नातक 113688 बेरोजगार हैं।
देहरादून में है सर्वाधिक बेरोजगारी
प्रदेश में सर्वाधिक 1,80,261 बेरोजगार देहरादून जिले में पंजीकृत हैं, जबकि सबसे कम 23,010 पंजीकृत बेरोजगार चंपावत में है। अल्मोड़ा में 69700, नैनीताल में 99004, पिथौरागढ़ में 69355, ऊधम सिंह नगर में 100241, बागेश्वर में 30802, टिहरी में 69058, उत्तरकाशी में 39784, हरिद्वार में 101720, पौड़ी में 63852, चमोली में 42890, रुद्रप्रयाग में 27075 बेरोजगार पंजीकृत है।
इस साल 321 लोगों को मिला रोजगार
सेवायोजन विभाग के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में नवंबर के अंत तक प्रदेश में विभाग की ओर से 321 बेरोजगारों को रोजगार मिला है। इनमें पौड़ी में 117, नैनीताल में 16, ऊधमसिंह नगर में 43, बागेश्वर में 21, देहरादून में तीन, टिहरी में नौ, उत्तरकाशी में 22, हरिद्वार में 61, चमोली में छह और रुद्रप्रयाग में दस बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराया गया है।
कई बेरोजगार रोजगार मिलने के बाद सेवायोजन कार्यालय से रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं कराते हैं। इससे वास्तविक संख्या में अंतर हो सकता है। पंजीकृत बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य बनने के बाद से अब तक रोजगार पाने वालों का ब्यौरा संकलित किया जा रहा है।
- अशोक कुमार, निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय