‘मिशन आक्रोश’ की चिंगारी को फिर हवा देने के आरोप में हरिद्वार की
ज्वालापुर पुलिस ने बर्खास्त सिपाही राकेश चंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज
दिया।
इस कार्रवाई को सोमवार को पूरे दिन छिपाए रखा गया ताकि सिपाहियों में आक्रोश न पैदा हो जाए। गुपचुप ढंग से राकेश को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्ष 2007 से पहले भर्ती हुए सिपाहियों की वेतन विसंगति व एरियर को लेकर बीते साल सोशल साइट्स पर ‘मिशन आक्रोश’ चलाया गया था।
तब इस मामले में अगस्त में उत्तरकाशी पुलिस ने ज्वालापुर के सुभाषनगर में रहने वाले राकेश चंद्र को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे सिपाहियों को भड़काने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था।
‘मिशन आक्रोश’ को शांत करने के लिए डीजीपी बीएस सिद्धू ने तब कहा था कि यदि 31 दिसंबर, 2015 तक 2007 से पहले भर्ती हुए सिपाहियों की वेतन विसंगति एवं एरियर की समस्या का निराकरण नहीं होता है वे पद से इस्तीफा दे देंगे।
इस तिथि के बीत जाने के बाद भी मांग पूरी न होने पर तीन दिसंबर पर फेसबुक पर डाली गई पोस्ट ने एक बार फिर हलचल पैदा कर दी। इस पोस्ट में सीधे डीजीपी पर हमला बोला गया था और मांग पूरी न होने की बात प्रमुखता से लिखी गई थी।
इस पर एसएसआई कमल मोहन भंडारी की ओर से अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने बताया कि मामले में कई अन्य पुलिसकर्मी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। इस दिशा में अभी जांच चल रही है।