पहले दिन बच्चों की उपस्थिति 52 फीसदी रही। दून मेें 980 राजकीय व अशासकीय प्राथमिक विद्यालयों में से 851 स्कूल खुले। जिले के सरकारी स्कूलों में पंजीकृत 36314 छात्रों में से 18824 छात्र ही पहुंचे। जबकि, केंद्रीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या बहुत कम रही। निजी स्कूल तो न के बराबर ही खुले।
लंबे समय बाद बच्चों के लिए खुले स्कूलों में पहले प्रबंधन की ओर से सैनिटाइजेशन के साथ ही सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए। सुबह नौ बजे से बच्चों को स्कूल बुलाया गया था, लेकिन बच्चे आठ बजे से ही स्कूल पहुंचने लगे। गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग एवं सैनिटाइजेशन के बाद उन्हें प्रवेश दिया गया। मुख्य गेट पर अभिभावकों की ओर से भरे गए सहमतिपत्र भी लिए गए। लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे छात्रों को पहले दिन पढ़ाने के अलावा उनकी वर्कशीट, गृहकार्य आदि चैक करने में शिक्षक व्यस्त रहे।
स्कूलों में छात्र संख्या कम होने से कहीं भी दो पालियों में कक्षाएं चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। जो बच्चे स्कूल नहीं आए उनके लिए ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की गई। उधर, केवि और निजी स्कूलों में बच्चों को भेजने को लेकर स्कूल प्रबंधकों को अभिभावकों के सहमतिपत्र का इंतजार है। अभिभावकों की मंजूरी मिलने के बाद ही इन स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी।
129 शिक्षक रहे अनुपस्थित
दून में 2086 शिक्षकों में से 129 स्कूल नहीं पहुंचे। इनमें 46 शिक्षक सीसीएल, 16 विभागीय प्रशिक्षण और 14 कोविड ड्यूटी में थे। वहीं, 79 शिक्षक आकस्मिक अवकाश एवं एक बिना सूचना के अनुपस्थित रहा। जिला शिक्षा अधिकारी आरएस रावत ने सभी स्कूलों को इन शिक्षकों से स्पष्टीकरण लेकर विभाग को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।