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खुलासा: उत्तराखंड में STF ने आठ माह में टेप किए 378 लोगों के फोन

Wed, 30 Mar 2016 11:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • 2005 से लेकर जून 2015 तक के टेलीफोन टेपिंग का रिकार्ड नष्ट।
  • जुलाई 2015 से लेकर आदेश के दिन तक 378 फोन टेप।
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फोन टेप - फोटो : demo
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विस्तार
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स्पेशल टास्क फोर्स ने द्वारा पिछले आठ महीने में उत्तराखंड में 378 लोगों के फोन टेपिंग के मामले से प्रदेश में हड़कंप मच गया। हाल ही आरटीआई के तहत इसका खुलासा होने पर यह मामला सियासी घमासान के बीच गरमा गया है। इस खुलासे के बाद विपक्ष स्टिंग के बाद फोन टैपिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को घेरने की तैयारी में जुट गया है।
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किन-किन लोगों को फोन टेप कराए गए, इस सवाल के जवाब में एसटीएफ ने 2005 से लेकर जून 2015 तक के टेलीफोन टेपिंग का रिकार्ड नष्ट करने का दावा किया गया है।

प्रदेश में फोन टेपिंग का मुद्दा काफी समय से सुर्खियों में है। एसटीएफ, एसओजी और कई थानाध्यक्ष अपने स्तर पर अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फोन टेपिंग को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। बीच-बीच में राजनीतिक रंजिश में फोन टेप कराए जाने के आरोप भी एसटीएफ पर लगते रहे हैं।
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इसके पहले की जानकारी गृह मंत्रालय के निर्देश पर नष्ट

Home Ministry - फोटो : PTI
अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह ने आरटीआई के तहत 2005 से लेकर अब तक हुए फोन टेपिंग का रिकॉर्ड मांगा था। करीब एक साल से जानकारी देने के नाम पर आनाकानी चल रही थी। यह मामला मानवाधिकार आयोग तक गया था।

लोक सूचना अधिकारी और आयोग के आदेश के अनुपालन में 17 मार्च को अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ मुकेश कुमार की ओर से जानकारी दी गई कि 2005 से माह जून 2015 की सूचनाएं गृह मंत्रालय के निर्देश पर नष्ट की जा चुकी है।

जुलाई 2015 से लेकर आदेश के दिन तक 378 फोन टेप किए गए हैं। हालांकि यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है कि फोन टेप किसके आदेश पर किए गए थे।
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प्रदेश में गरमा सकती है टेपिंग पर राजनीति

कॉल - फोटो : demo pic
अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह इस मामले में अपीलीय अधिकारी के यहां जाने की तैयारी में है। आरटीआई के तहत यह जानकारी उस समय आई, जब प्रदेश में सियासी घमासान चल रहा है।

पहले से भाजपा फोन टेप करने को लेकर कांग्रेस को आरोपित करती रही है। ऐसे में मामले के सामने आने से भाजपा इसे हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी की गई है। एक भी दुरुपयोग का मामला अभी तक सामने नहीं आया है।
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