प्रसिद्ध लेखक एवं कवि पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी को अखिल भारतीय बिड़ला फाउंडेशन की ओर से ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित किया गया। साहित्य के पुरोधा लीलाधर जगूड़ी को यह सम्मान उनकी हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह ‘जितने लोग, उतना प्रेम’ के लिए दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस काव्य संग्रह में प्रेम संबंधी कविताएं, नई भाषा और नई दृष्टि के साथ उन्होंने लिखी हैं। प्रेम की अलग-अलग छवि होती है और अलग-अलग व्यक्तित्व होते हैं।
शुक्रवार को वयोवृद्ध साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने बताया कि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास की काव्य रचनाओं की स्थली है। महर्षि से जुड़ी कई स्मृतियां देवभूमि से भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में बिड़ला फाउंडेशन की ओर से ‘व्यास सम्मान’ दिया जाना न सिर्फ उनके लिए बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों एवं साहित्यकारों के लिए बड़ी उपलब्धि एवं सम्मान है। काव्य संग्रह ‘जितने लोग, उतने प्रेम’ को लेकर साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने बताया कि इस काव्य संग्रह में प्रेम संबंधी कविताएं, नई भाषा और नई दृष्टि के साथ लिखी गई हैं। उन्हें दिया गया यह सम्मान हिंदी साहित्य के उत्थान को समर्पित है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ-साथ गढ़वाली एवं कुमाऊंनी का भी उत्थान होना चाहिए। अपने साहित्य संग्रह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ‘अनुभव के आकाश में चांद’ काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया। जबकि ‘भय भी शक्ति देता है’ काव्य संग्रह के लिए शतदल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नामवर सिंह ने कहा कि जगूड़ी के काव्य संग्रह ‘जितने लोग, उतना प्रेम’ को पढ़कर पहली बार पता चला कि प्रेम बहुवचन भी है।
यह मिल चुके सम्मान
>> वर्ष 2004 में पहला पद्मश्री पुरस्कार मिला।
>> वर्ष 1997 में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
>> पश्चिम बंगाल की भारतीय भाषा परिषद की ओर से शतदल पुरस्कार दिया।
>> ओड़िसा के एक विवि ने ‘गंगा नेशनल अवार्ड ’से सम्मानित किया।
>> पहला काव्य संग्रह वर्ष 1964 में प्रकाशित हुआ था।