30 साल की सावित्री देवी का परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन (बीपीएल) करता है। इस गरीब परिवार के 20 सदस्यों के लिए एक ही राशनकार्ड है।
परिवार को सरकारी सस्ते गल्ले से महज 28 किलो गेहूं और चावल मिलता है, जिससे दस दिन भी गुजारा नहीं हो पाता है। दूसरे राशन कार्ड की परिवार की तमाम कोशिशें नाकाम रही है। चंपावत विकासखंड के खटोली गांव की सावित्री देवी के राशन कार्ड में उसके परिवार के 22 लोगों के नाम दर्ज हैं, जबकि दो की मृत्यु हो चुकी है।
अब बचे 20 लोगों को एक ही राशन कार्ड से राशन मिलता है, जबकि परिवार की रसोई काफी समय से अलग-अलग है। महज 28 किलो गेहूं और चावल से गुजारा नहीं हो पाता है। मजदूरी कर पेट पालने वाले इस परिवार को हर माह 60 किलो राशन खुले बाजार से ऊंची कीमत पर लेना पड़ता है।
परिवार के लोग बताते हैं कि कार्ड को लेकर कई बार विभाग से गुजारिश की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक बोहरा का कहना है कि मजदूरी कर गुजारा करने वाले इस परिवार की माली हालत खराब है। परिवार के लोगों के अलग-अलग रहने से दो नए राशन कार्ड बनाए जाने का आग्रह पूर्ति विभाग से किया है।
मामला उनके संज्ञान में नहीं है। प्रकरण सामने आने पर नियम के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत यूनिटवार राशन का प्रावधान है, तब अधिक संख्या वाले राशन कार्डधारकों को भी लाभ होगा।
- एसएल आर्या, जिला पूर्ति अधिकारी, चंपावत