अंग्रेजी के सुप्रसिद्ध लेखक पद्मश्री रस्किन बांड ने विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर प्रकृति और गांव के बचपन पर आधारित अपनी नई किताब कोकी के गीत (कोकीज सोंग) पाठकों को समर्पित की। मंगलवार को कुलड़ी स्थित कैम्ब्रिज बुक डिपो में पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता के साथ रस्किन बांड ने कोकी के गीत पुस्तक का विमोचन किया।
इस दौरान बड़ी संख्या में रस्किन के प्रशंसकों ने पुस्तक खरीदी। इसे यादगार बनाने के लिए किताब पर रस्किन के हस्ताक्षर लिए और उनके साथ जमकर फोटो और सेल्फी ली। अपने चेहते लेखक से मिलने की चाह में प्रशंसक घंटों इंतजार करते देखे गए। प्रशंसक लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। रस्किन बांड के एक प्रशंसक अफगानिस्तान के मलिक मोहम्मद नासरी, रसियन विक्टोरिया और क्रिस्टिना ने कहा कि वह दोस्तों के साथ मसूरी आए हैं। पुस्तक दिवस पर रस्किन बांड से मुलाकत होने पर वह बहुत खुश हैं। वहीं, रस्किन बांड ने सबको पुस्तक दिवस और पर्यटन सीजन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह बच्चों के लिए हमेशा लिखते रहेंगे।
किताब में रस्किन बांड ने दो बच्चों के बीच बाल्यावस्था के प्रेम को दर्शाया है। यह कहानी शहर की 12 वर्षीय लड़की कोकी और गांव के ग्वाला सोमी की है। कहानी में कोकी मवेशी चराते समय अपनी बांसुरी पर मधुर धुन बजाता है, यह धुन शहर से छुट्टी मनाने नानी के गांव आई कोकी को बहुत भाती है। एक दिन कोकी सोमी की बांसुरी की धुन पर उसके पास दौड़ी चली आती है। दोनों के बीच मासूम प्यार की शुरुआत होती है। कोकी सोमी के लिए एक गीत बनाती है, जिसे सोमी अपनी बांसुरी की धुन से सजाता है।
रस्किन के उपन्यास पर बन चुकी है फिल्म
बता दें कि बांड ने 500 से अधिक लघु कथाएं, निबंध और उपन्यास लिखे हैं। उनके लोकप्रिय उपन्यास द ब्लू अम्ब्रेला पर एक हिंदी फिल्म भी बनी है, जिसे 2007 में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। बांड को 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।