पूरी दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से दौड़ने वाले वन्यजीवो में शुमार चीतों से अब देश के जंगल फिर आबाद होंगे। सात दशक पूर्व देश से पूरी तरह विलुप्त हो गए चीतों को अब एक बार फिर जंगलों में बसाने की तैयारी है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत दक्षिण अफ़्रीका और नामीबिया से चीतों को लाने की तैयारी है।
चीतों को जल्द भारत लाया जा सके इसके लिए अगले महीने भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन और वरिष्ठ वन्यजीव विज्ञानी डॉ. वाईवी झाला के साथ अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों की टीम दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया भी जाएगी। डॉ. झाला के मुताबिक पहले चरण में 12 चीतों को लाने की तैयारी है। इसके लिए दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया की सरकार के साथ वार्ता कर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। डॉ. झाला ने बताया कि चीतों को बहुत पहले लाया जाना था, लेकिन कोरोना संकट के चलते प्रक्रिया में देरी हो गई।
कूनो पालपुर, नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्यों में रखे जाएंगे चीते
भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन व वरिष्ठ वन्यजीव विज्ञानी डॉ. वाईवी झाला के मुताबिक नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाने के बाद मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर और नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्यों में रखा जाएगा। जहां चीतों को प्राकृतिक पर्यावरण मुहैया कराया जा सके इसके लिए सारी तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
चीतों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां
- नर चीता हमेशा झुंड में रहते हैं जबकि मादा चीता बच्चों के साथ अकेले रहती हैं।
- चीता भारत समेत एशिया के प्रमुख देशों से विलुप्त हो चुके हैं।
- ईरान में वर्तमान में चीतों की संख्या 100 के आसपास है, जो ईरान के पठारी इलाकों में रहते हैं।
- शिकार पकड़ने के लिए चीता 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी दौड़ सकता है।
- बिल्ली प्रजाति का जानवर होने के बावजूद चीता कभी दहाड़ता नहीं है।