प्रदेश के पांच नहीं 11 जिले सूखे की चपेट में हैं। बारिश कम होने से दो जिलों को छोड़कर बाकी सभी जिलों में सूखा पड़ा है। फसलें सूख गई हैं और जलस्रोतों से पानी गायब है। सिर्फ हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की स्थिति थोड़ी ठीक है। प्रदेश शासन को जिलों ने सूखे की स्थिति पर जो रिपोर्ट भेजी है, उससे यह स्थिति उजागर हुई है।
पहले बताया सिर्फ पांच जिले
शासन पहले पांच जिलों को सूखा प्रभावित बता रहा था, लेकिन जिलों से मिल रही सूचना में स्थिति बिगड़ती बताई जा रही थी। इस पर शासन ने जिलों से सूखे की वास्तविक रिपोर्ट मंगाई। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि जिलों से मिली रिपोर्ट से 11 जिलों में सूखे की पुष्टि हुई है।
इन जिलों में असिंचित भूमि अधिक है। इससे दिक्कत अधिक बढ़ी है। फिर भी सूखाग्रस्त अन्य प्रांतों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति अभी बेहतर है। उन्होंने ने बताया कि स्थिति से निपटने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्वतीय जिले सबसे अधिक प्रभावित
सूखे से सबसे अधिक प्रभावित पर्वतीय जिले हैं। यहां की ज्यादातर भूमि वर्षा पर निर्भर है। खेतों की सिंचाई की अन्य व्यवस्था नहीं है। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में सिंचित भूमि अधिक है। इस वजह से सूखे का प्रभाव इन जिलों में कम है। वर्षा कम होने के कारण सबसे अधिक प्रभाव पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ा। यहां सिंचाई संबंधी परियोजनाएं ढंग से चालू नहीं हो पाईं।