आपदा के बाद अब प्रदेश में संक्रमण फैलने लगा है। उत्तरकाशी जनपद के गाजणा क्षेत्र के उडरी गांव में डायरिया का प्रकोप बढ़ गया है। यहां पांच दिन के भीतर दो महिलाओं की जान चले गई है।
वहीं रुद्रप्रयाग के डडोली गांव में फूड प्वाइजनिंग से एक आठ साल के बालक की मौत हो गई है, जबकि उसकी मां अस्पताल में भर्ती है।
50 से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित
236 परिवारों वाले उडरी गांव में 50 से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हैं। ग्रामीणों ने डायरिया पर काबू पाने तक गांव में मेडिकल टीम तैनात करने और स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने की मांग की है। 5 जुलाई को ठुमा देवी की डायरिया से मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीम गांव तो भेजी, लेकिन यहां स्थायी कैंप नहीं करने से डायरिया में नियंत्रण नहीं पाया जा सका।
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मंगलवार को डायरिया पीड़ित विशिला देवी (62) पत्नी कमल सिंह रावत की हालत बिगड़ने पर ग्रामीण उन्हें अस्पताल लेकर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। उल्टी-दस्त से पीड़ित उडरी गांव के नवीन, मकानी देवी, बचना देवी, रामचंद्री देवी, हरि चंद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ग्रामीण दिनेश रावत, जय सिंह राणा आदि ने बताया कि गांव में मेडिकल टीम तो पहुंची है, लेकिन स्थायी कैंप नहीं कर रही है। जिससे डायरिया पूरी नियंत्रण में नहीं आ पा रहा है। गांव में अभी तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है।
अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया
सीएमओ उत्तरकाशी डा. मयंक उपाध्याय ने बताया कि दूषित पेयजल से डायरिया फैला है। ग्रामीणों को क्लोरीन की गोलियां वितरित करने के साथ ही इस संबंध में जल संस्थान से भी कार्रवाई के लिए कहा गया है।
रुद्रप्रयाग के डडोली गांव में रविवार देर रात निखिल (8) और उसकी माता सीता देवी को उल्टी-दस्त होने शुरू हो गए थे। सोमवार सुबह परिजन दोनों को पठालीधार अस्पताल ले गए, जहां पहुंचने से पूर्व ही निखिल ने दम तोड़ दिया था। जबकि उसकी माता सीता देवी अस्पताल में भर्ती है। वहीं चिकित्सकों ने सीता को खतरे से बाहर बताया है।
बताया गया कि निखिल और सीता ने रविवार रात को अरबी की सब्जी खाई थी। उसके बाद से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। गांव की सलोनी (13) और अनीता देवी भी उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। बताया गया कि सलोनी, अनीता ने अस्पताल जाने से इंकार कर दिया, जिससे गांव में ही उनका इलाज किया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही सीएमओ केडी शर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी अमित शुक्ल, बाल रोग विशेषज्ञ डा. प्रवीन, जल संस्थान के ईई खंडूडी गांव पहुंच गए हैं।
शवों के पड़े होने की खबरों से लोग सहमे
उधर, आपदा के बाद नदी में शवों के पड़े होने की खबरों से लोग सहमे हैं। अब नलों से आ रहे गंदले पानी ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। श्रीनगर शहर में कई दिनों से गंदला और बदबूदार पानी आ रहा है, जो पीने लायक तक नहीं है। इससे वहां संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना है।
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