16-17 जून को केदारघाटी में आया जलप्रलय रोजगार करने वाले युवकों के लिए प्रलयकारी साबित हुआ। मंदाकिनी नदी की बाढ़ में केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर होटल-लॉज बह गए, जो बचे हैं, वह कभी भी गिर सकते हैं।
सालों की मेहनत पर फिरा पानी
इसके अलावा उन युवकों के समक्ष भी संकट खड़ा हो गया है, जिनके होटल सुरक्षित हैं, लेकिन यात्रा ठप होने से होटल भी बंद हो गए हैं।
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इन युवकों ने बैंक या अपने सगे संबंधियों से कर्ज लेकर होटल, लॉज बनाए थे, लेकिन एक झटके में उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया।
बह गए तीस होटल
केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तिलवाड़ा से केदारनाथ धाम तक काफी संख्या में होटल-लॉजों का निर्माण किया गया है। यात्राकाल में अच्छी कमाई की उम्मीद में स्थानीय लोगों ने कर्जा लेकर अपनी जमा-पूंजी भी इन होटलों पर लगा दी। बाढ़ में स्यालसौड़, गबनीगांव, चंद्रापुरी, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सड़क किनारे लगभग 30 होटल बह गए।
होटल प्रियदर्शनी के संचालक गगन बिष्ट बताते हैं कि उन्होंने छह करोड़ रुपये का होटल बनाया था। होटल के अंदर लगभग डेढ़-दो करोड़ रुपये का सामान भी था, लेकिन आज कुछ भी नहीं बचा है।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना के तहत निर्मित होटल, लॉजों का सर्वेक्षण कराया जाएगा। संबंधित रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जाएगी।
- सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी
व्यावसायिक भवनों को दैवी आपदा राहत मद में मदद नहीं मिल पाएगी। कर्ज माफी या आर्थिक सहायता संबंधी निर्णय शासन स्तर का है।
-नवनीत पांडे, एडीएम