दुनिया के सबसे बड़े एनजीओ में से एक आर्ट आफ लिविंग भी पहाड़ों में आपदा पीड़ितों की मदद को आगे आया है। दक्षिण और पश्चिमी भारत से संस्था के कई सदस्यों ने एक हफ्ते तक आपदा पीड़ितों की सेवा में बिताए और यहां से काफी भावनात्मक अनुभव लेकर लौटे।
इनमें से ज्यादातर उत्तराखंड पहली बार आए थे। उन्हें यहां के हालातों की जानकारी नहीं थी लेकिन सेवा का जज्बा जबरदस्त था। बैंगलोर के साफटवेयर कंसल्टेंट रितेश कुमार सहाय, श्रीकांत निम्मराजु और हैदराबाद के सतीश रुद्रराजु ने मीडिया में उत्तराखंड की तबाही की खबरें देखीं।
वह पीड़ितों की मदद करना चाहते थे। उनका संकट यह था कि वे उत्तराखंड में किसी को नहीं जानते थे और न ही इस से पहले कभी उत्तराखंड आए थे। उन्होंने उत्तराखंड में आर्ट आफ लिविंग के स्वयंसेवक से संपर्क किया।
संयोगवश आर्ट आफ लिविंग की टीम उसी दिन श्रीनगर के लिये रवाना होने वाली थी। सभी साथ हो लिए। आर्ट आफ लिविंग की टीम ने श्रीनगर से 50 किमी दूर चंद्रपुरी के गांवों के समूह, नीली, कुंड और अर्कुंड में पहुंच कर पीड़ितों के बीच एक हफ्ता बिताया। दवा और भोजन बांटा।
टीम में शामिल सतीश ने बताया कि यह उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव था। हमें बहुत ही शारीरिक श्रम करना पड़ा लेकिन दूसरों की सहायता से संतोष मिला। रितेश ने बताया मेरे लिये यह दिल को छूने वाला अनुभव था। मैं भाग्यशाली हूं कि मैं जरूरतमंदों तक पंहुच पाया और प्रभावित क्षेत्र में कुछ काम कर सका।
के इस्माइल ने बताया हम यहां पर वालंटियर फार बेटर इंडिया के तहत काम करने आए हैं और इस तीर्थ स्थान पर हम अपना छोटा सा योगदान देना चाहते हैं। आर्ट आफ लिविंग देहरादून चैप्टर की टीम राहत सामग्री लेकर आज श्रीनगर रवाना हो चुकी है। टीम ने सबसे उत्तराखंड के पुनर्निर्माण के लिए अपना योगदान देने का आग्रह किया है।