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आपके घर सिंथेटिक दूध तो नहीं आ रहा?

Tue, 07 Mar 2017 01:44 AM IST
बरेली।  
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आपके घर सिंथेटिक दूध तो नहीं आ रहा? - फोटो : Synthetic milk is not coming home?
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केस एक- बदायूं रोड के एक गांव से रोजाना दूध शहर में लाकर बेचने वाले पप्पू गुर्जर बाकी दूध विक्रेताओं के साथ क्रीम निकालने वाली मशीन  के पास खड़े थे। बोले- हमारा तो छोटा काम है। केवल पानी मिलाते हैं। दूध में रिफाइंड, यूरिया बगैरह तो प्लांट वाले मिलाते हैं। अगर मिलावट देखनी है तो आंवला जाइए। सब कुछ पता चल जाएगा।
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केस दो, न्यूशिप डेयरी प्लांट मालिक अखिलेश शर्मा से जब मिलावटी दूध के बारे में बात की गई तो बोले- हम घी का पाउडर बनाने के लिए दूध विक्रेताओं से रोजाना 40 रुपये लीटर खरीदते हैं। फिर चिल्ड करके मेरठ और अतरौली भेजते हैं। उनके प्लांट में मिलावट चेक करने के लिए लैब है। लेक्टोमीटर से चेक करने में अगर फैट कम होता है तो उस विक्रेता को वापस कर देते हैं। मिलावट का कारोबार दूध विक्रेता ही करते होंगे। 
केस तीन, कोनी गांव में अपने घर से बाइक पर दूध बेचने निकले एक युवक से जब मिलावटी दूध के बारे में पूछा गया तो बाइक आगे बढ़ा दी। फिर रुककर बोला- गांव के हर घर से दूध बिकता है। कुछ बड़े लोग मिलावट करके दूध बेचते हैं। हम तो सिर्फ पानी मिलाते हैं। 
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बरेली। रोजाना औसतन दूध उत्पादन- 1.05 लाख लीटर। दूध की आपूर्ति हो रही-1.60 लाख लीटर। होली पर दो सप्ताह से दूध की खपत प्रतिदिन औसतन 25 हजार लीटर और बढ़ गई है लेकिन उत्पादन उतना ही है। इस तरह उत्पादन से 80 हजार लीटर ज्यादा खपत है। अब सवाल है कि ये अतिरिक्त दूध कहां से आ रहा है। जाहिर सी बात है कि ये दूध या तो पानी मिलाकर या फिर सिंथेटिक बनाकर पूरा किया जा रहा है। दूध विक्रेता मिलावटी कारोबार के लिए प्लांट मालिकों और प्लांट मालिक दूध विक्रेताओं को जिम्मेदार ठहराते हैं। 
कैसे बनता है सिंथेटिक दूध
लोहे की कढ़ाई में पानी की मात्रा के हिसाब से सफेद कलर का पेंट, सैम्पू, यूरिया, रिफाइंड का घोल तैयार करते हैं। दूध शुद्ध दिखने के लिए इसमें थोड़ा सपरेटा दूध भी मिलाते हैं। फार्मोलिन डालने से दूध में मलाई की परत जमती है। ये सब मिलाकर  दूध जैसा पदार्थ तैयार किया जाता है जिसकी लागत 15 से 18 रुपये प्रति लीटर आती है। दूधिए इस दूध 25 से 30 रुपये प्रति लीटर बेच देते है जबकि असली दूध की कीमत 45 से 50 रुपये प्रति लीटर है। 
सिथेंटिक दूध की पहचान
1- हथेली में रगड़ने पर चिकनाई के साथ झाग छोड़ता है
2- उबालने पर हल्का पीला पड़ जाता है।
3- काफी देर तक न उबालने पर भी खराब नहीं होता
4- कई दिन तक रखने के बाद भी नहीं फटता
5-मलाई कम मोटी पड़ेगी और कलर पीला दिखेगा।
ऐसे करें केमिकल जांच
एक टेस्ट ट्यूब में दूध का मात्रा के बराबर ही हाइड्रो क्लोरिक एसिड मिला कर गर्म करें। लाल रंग आता है तो वनस्पति की मिलावट है। परखनली में दूध के साथ यूरिएज एन्जाइम मिलाकर हिलाएं। पांच बूंद पोटेशियम कार्बोनेट मिलाकर फिल्टर पट्टी पर कार्क से ढक दें। फिल्टर पेपर का रंग लाल और फिर हरा हो जाए तो मान लीजिए यूरिया मिला है।
मावा की जांच
मेडिकल स्टोर से आयोडान टिंचर लाएं। कुछ बूंदें मावा पर डालें। रंग काला या बैंगनी पड़ने लगे तो समझ लीजिए आलू शकरकंद की मिलावट है।
 मिलावटी कारोबार के अड्डे
बदायूं की बिनावर तहसील, आंवला कस्बों के अलावा गांव धनेटा, भमौरा, आलमपुर, कोनी, लहर, हिम्मतपुर, सरदार नगर, गूजर गौंटिया, सूदनपर, भंगौली, रफियाबाद, मजनूपुर, अखा, ढका, चौबारी, शहबाजपुर, बिरिया, फतेहपुर, इटौआ, दौली रघुवर दयाल, फरीदपुर तहसील के गांव इदौरिया, परौल, मंझा, चठिया, नगरिया, शिवपुरी, चठनपुर, रम्पुरिया, नगरिया, सैदपुर के अलावा नकटिया के आस-पास के गांव। 
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शहर में रोजाना दूध की खपत                   1.60 लाख लीटर (आंकड़े लगभग में)
करीब 700 डेयरियों से रोजाना दूध उत्पादन-  70 हजार लीटर 
दूधिओं से दूध की आपूर्ति ---         15 हजार लीटर 
पराग समेत अन्य डेयरियों से आपूर्ति - 20 हजार लीटर
आपूर्ति और उत्पादन में अंतर     --  55 हजार लीटर 
त्योहारों पर दूध की डिमांड में वृद्धि -- 25 हजार लीटर 
मिलावटी और सिंथेटिक दूध की रोजाना सप्लाई -- 80 हजार लीटर प्रतिदिन 
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