गाेविंद नगर डकैती कांड: पीड़िता आशा गुप्ता
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कानपुर के गाेविंद नगर स्थित शिवम अपार्टमेट में पड़ी डकैती का खुलासा क्राइम ब्रांच के एक दरोगा की सक्रियता व सूझबूझ की वजह से हुआ। एक तरह से दरोगा ही खुलासे के सूत्रधार रहे। एक मोबाइल को चंद सेकेंड के लिए ऑन करना डकैतों के लिए भारी पड़ गया। यहीं से वह जाल में फंसे और फिर परतें खुलती गईं। क्राइम ब्रांच उन तक आसानी से पहुंच गई।
डीसीपी क्राइम के मुताबिक दरोगा सुनीत शर्मा ने इंटरनेट की मदद से डकैती की वारदातों के बारे में सर्च किया। इसमें नालंदा और झारखंड में पड़ीं दो डकैतियों को चिह्नित किया। इन दोनों वारदातों को ठीक उसी तरह से अंजाम दिया गया था जिस तरह से गोविंद नगर की घटना को।
दरोगा ने नालंदा व झारखंड पुलिस से संपर्क किया। नालंदा पुलिस ने बताया कि उन्होंने सुधीर महतो व जोगेंद्र को डकैती के मामले में जेल भेजा है। इसमें वांछित मुन्ना यादव देवरिया जेल में बंद है। दरोगा ने नालंदा व झारखंड पुलिस से तमाम जानकारी ली। उसमें 20 आईएमईआई नंबर भी थे।
जब तफ्तीश की तो पता चला कि 16 सितंबर की रात वारदात के बाद इनमें से एक आईएमईआई नंबर करीब 13 मिनट तक घटनास्थल के आसपास एक्टिव रहा था। उसमें एक नंबर भी चालू था। उसी आधार पर क्राइम ब्रांच ने किशोर को गिरफ्तार किया। जिसके बाद उससे पूछताछ में पूरी घटना खुल गई।