टी20 विश्व कप में टीम इंडिया के पहले मैच का हाल देखने के बाद ये बात तो तय है कि टी20 में 'कमजोर टीम' जैसा कोई कांसेप्ट नहीं है। भारत को अपना पहला मैच कमजोर मानी जाने वाली अफगानिस्तान टीम से जीतने में काफी मेहनत करनी पड़ी। मैच से पहले ही इस बात पर काफी चर्चा हो चुकी थी कि धोनी को अपने टीम में कम से कम 5 गेंदबाज को शामिल करना चाहिए। लेकिन धोनी विश्व कप के पहले से ही यह मान बैठे हैं कि उनके पार्ट टाइम गेंदबाज ही उन्हें जीत दिलाएंगे।
इसीलिए धोनी केवल तीन नियमित गेंदबाज और एक आलराउंडर (इरफान पठान) के साथ मैदान पर उतर रहे हैं। हालिया दिनों में धोनी की इस टीम को न्यूजीलैंड से घरेलू सीरीज में और पाकिस्तान से अभ्यास मैच में हार मिल चुकी है। ग्रुप मैच में भी अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया की गेंदबाजी बौनी साबित हो रही थी। वो तो भला हो पार्ट टाइम गेंदबाज युवराज का जो सही समय में अफगानिस्तान के 3 विकेट झटक भारत को मैच में वापस ला दिए। अफगानिस्तान के खिलाफ भारत का संघर्ष साफ दिख रहा था। टीम इंडिया को जीत के लिए अंतिम ओवर तक का इंतजार करना पड़ा।
अब सवाल यह उठता है क्या धोनी अपने पार्ट टाइम गेंदबाज युवराज की सफलता को देखते हुए आने वाले मैचों में भी यही टीम कांबिनेशन रखेंगे? कहीं ऐसा तो नहीं धोनी पिछले कई सीरीज से फ्लॉप हो रहे जहीर को भी बैठा कर केवल दो नियमित गेंदबाज से खेलें और युवराज, रोहित, सहवाग, रैना, मनोज तिवारी और विराट कोहली को गेंदबाजी की जिम्मेदारी सौंप दें। लेकिन क्या धोनी ये भूल गए हैं कि बड़ी टीमें पार्ट टाइम गेंदबाजों को नहीं बख्शती, इसका उदाहरण उन्हें पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ मिल गया होगा। तो क्या होगा जब टीम का मुकाबला सुपर-8 में बड़ी टीमों से होगा। क्या धोनी तब भी इसी टीम के साथ मैदान पर उतरेंगे?