टी20 विश्व कप 2024 की ट्रॉफी जीतकर भारत ने 11 साल के इंतजार को खत्म कर दिया। साल 2013 में टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। हालांकि, इससे बाद से ही भारत एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाया। शनिवार को बारबाडोस में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को सात रनों से हरा दिया। इस जीत में विराट कोहली और अक्षर की बल्लेबाजी के साथ जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हार्दिक पांड्या की गेंदबाजी का अहम योगदान था। इस जीत में सूर्यकुमार यादव के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। भले ही वह बल्ले से अपना दम न दिखा पाए हो, लेकिन उनकी एक कैच ने दक्षिण अफ्रीका को दबाव में डाल दिया। सूर्यकुमार के इस कैच को मैच का टर्निंग प्वाइंट भी कहा जा सकता है। उन्हें इस कैच के लिए टीम मैनेजमेंट की तरफ से बेस्ट फील्डर ऑफ द मैच का मेडल दिया गया।
सूर्यकुमार यादव के कैच ने मुकाबले को भारत की तरफ पलट दिया था। उन्होंने खतरनाक कैच पकड़ा था। इसमें अगर थोड़ी भी चूक होती तो गेंद बाउंड्री लाइन को पार कर जाता और दक्षिण अफ्रीका को छह रन मिलते। यह कुछ ऐसा था जिसने मैच के नतीजे को पलट दिया। आमतौर पर टीम इंडिया के फील्डिंग कोच टी. दिलीप मैच के बाद फील्डर ऑफ द मैच का मेडल देते हैं। मेडल देने से पहले फील्डिंग कोच हमेशा तीन-चार खिलाड़ियों का नाम लेते हैं। ये वो खिलाड़ी होते हैं, जिन्होंने मैच में अच्छी फील्डिंग करते हैं। लेकिन फाइनल मुकाबले के बाद फील्डर ऑफ द मैच की दावेदारी में सूर्यकुमार यादव के अलावा कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं था। ऐसा कहा जा सकता है कि वह फील्डर ऑफ द मैच का मेडल निर्विरोध जीते। इससे मालूम चलता है कि उनका कैच फाइनल मुकाबले के लिए कितना महत्वपूर्ण था। सूर्यकुमार यादव को यह मेडल बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने पहनाया।
डेविड मिलर का विकेट तब गिरा जब दक्षिण अफ्रीका जीत की तरफ तेजी से बढ़ रही थी। दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी के दौरान 19.1 ओवर में हार्दिक पांड्या की लो वाइड फुल टॉस गेंद पर डेविड मिलर ने उठाकर शॉट खेला। गेंद लॉन्ग ऑन की तरफ हवा में उछल गया। सूर्य गेंद ने गेंद को बाउंड्री पार जाने से पहले कैच कर लिया, लेकिन इस दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह बाउंड्री लाइन के पार जाने से पहले गेंद को हवा में छोड़ दिया और फिर कैच लिया।