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अवेश खान की कहानी: पिता चलाते थे पान की दुकान, अब जोकर बनकर घूमता है बेटा, जानिए कैसे बन गए दिल्ली के सबसे खास गेंदबाज

Sun, 03 Oct 2021 04:27 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अवेश खान के पिता पान की दुकान चलाते थे। उन्होंने मुश्किल हालातों में अपना करियर बनाया है। उनके अंदर घमंड नहीं था, लेकिन अच्छा प्रदर्शन करने पर अवेश भावनाओं में बह जाते थे। अब उन्होंने इसमें बदलाव किया और उनका प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। 
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आवेश खास इस सीजन में दिल्ली के सबसे बेहतरीन गेंदबाज रहे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली कैपिटल्स के तेज गेंदबाज अवेश खान के लिए IPL 2021 बहुत ही शानदार रहा है। इस सीजन में उन्होंने 12 मैचों में 21 विकेट झटके हैं और सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में  हर्षल पटेल के बाद दूसरे स्थान पर हैं। दिल्ली की टीम इस सीजन में लगातार शुरुआती दो टीमों में बनी रही है और इसमें अवेश का काफी अहम योगदान हैं। रबादा, नॉर्टजे और अश्विन जैसे बड़े नामों के साथ खेलते हुए अवेश ने इसी सीजन में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने दिल्ली के लिए हमेशा मुश्किल समय पर विकेट निकाले हैं और रबादा जैसे गेंदबाज से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान उनकी इकॉनमी भी बेहद शानदार रही है। हालांकि कोरोना के आने के पहले अवेश का प्रदर्शन ऐसा नहीं था, लेकिन साल 2021 में जब उन्होंने वापस मैदान में कदम रखा तो उनके लिए सब कुछ बदल गया। 
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अवेश के पिता पान की दुकान चलाते थे और उन्होंने मुश्किल हालातों में क्रिकेट में अपना करियर बनाया। वो जब अंडर-14 क्रिकेट खेल रहे थे तभी उनकी अच्छी गति के चलते उन्हें पहचान मिल चुकी थी और साल 2016 में उन्होंने भारत के लिए अंडर-19 वर्ल्डकप भी खेला। इस टूर्नामेंट में वो सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। हालांकि फाइनल मैच में उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा। अवेश इस समय अपने साथी गेंदबाज खलील अहमद के कंधे पर सिर रखकर बहुत रोए थे। इसके बाद वो अचानक ही गायब हो गए। वहीं खलील को भारतीय टीम में भी खेलने का मौका मिला और वो लगातार भारतीय तेज गेंदबाजों के पूल में रहे, लेकिन अवेश के साथ ऐसा नहीं हुआ।

निरंतरता की कमी बनी अवेश की समस्या

अवेश खान के पास गति शुरुआत से ही थी, लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं थी। वो एक मैच में अच्छा प्रदर्शन करते थे और फिर उसका जश्न ऐसा होता था कि अगले मैच में उनकी गेंदबाजी बिल्कुल ही साधारण रहती थी। उन्होंने मध्यप्रदेश के लिए खेलते हुए कई मैच पलटने वाले स्पेल भी डाले, लेकिन उनका नाम भारतीय टीम के संभावित खिलाड़ियों में भी नहीं था। अवेश अक्सर गेंद डालने से पहले अपना प्लान बदल देते थे। इस वजह से उनकी गेंदबाजी सटीक नहीं थी और बल्लेबाज आसानी से उनके खिलाफ रन बटोरते थे। अब वो अपनी गेंदबाजी को लेकर किसी भी तरह के संशय में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब अगर उन्हें यॉर्कर फेंकनी है तो वो वही गेंद फेंकते हैं और पिच या बल्लेबाज के बारे में नहीं सोचते। इसी वजह से उनकी गेंदबाजी बेहतर हुई है।

घमंड खत्म होने से बदली किस्मत

मध्यप्रदेश के कोच चंद्रकांत पंडित के अनुसार अवेश अच्छा प्रदर्शन करने के बाद खुद को बहुत बेहतर गेंदबाज समझने लगते थे और यही सोच उनकी सबसे बड़ी दुश्मन थी। कोरोना के बाद जब उन्होंने अभ्यास शुरू किया तब मध्यप्रदेश के कोच चंद्रकांत पंडित ने उनकी इसी सोच को बदला। इसके बाद अवेश लगातार अपनी गेंदबाजी में काम कर रहे हैं। पंडित ने कहा "एक मैच में अच्छी गेंदबाजी करने के बाद आप से उम्मीदें बढ़ जाती हैं। ऐसे में आपको जश्न मनाने की बजाय और बेहतर प्रदर्शन की तैयारी करनी पड़ती है। अवेश पहले ऐसा नहीं कर पा रहे थे। अब उनका व्यवहार बदला है और इसका नतीजा उन्हें मिला है।" अब अवेश अपनी फिटनेस पर भी जोर दे रहे हैं, फिटनेस बेहतर होने से उनकी गेंदबाजी और भी बेहतर हुई है। 
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अब जोकर बनकर घूम रहे हैं अवेश

अवेश खान का व्यवहार पिछले दो सालों में बहुत तेजी से बदला है। अब वो बहुत ही शांत स्वभाव वाले इंसान बन चुके हैं। अवेश इन दिनों ड्रेसिंग रूम में नीले रंग का शूट पहनकर घूमते रहते हैं। इस वजह से उनकी साथी खिलाड़ी मजाक भी बनाते हैं, लेकिन उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है। उनका कहना है कि जब तक उनके साथी खिलाड़ी इससे खुश हैं, तब तक उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। अवेश के व्यवहार में आया यह बदलाव उनकी सफलता का बड़ा कारण है। मध्यप्रदेश के कोच पंडित के अनुसार कोई भी खिलाड़ी टीम से बड़ा नहीं होता है और अवेश यह बात समझ चुके हैं। इसी वजह से वो सफल हो रहे हैं। 
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