9 से 14 अगस्त के बीच ओल्ड ट्रैफर्ड क्रिकेट मैदान पर खेले गए इस मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी की। इंग्लिश टीम का पारी का आगाज करने उतरे ग्राहम गूच और माइक अथर्टन ने भारतीय गेंदबाजों की हवा निकाल दी। दोनों सलामी बल्लेबाजों ने शतक लगाते हुए पहले विकेट के लिए 225 रनों की साझेदारी की। गूच 116 और अर्थटन 131 रन बनाक आउट हुए। इसके बाद मध्यक्रम में डेविड गावर, एलन लैंब और जैक रसेल बहुत बड़ी पारियां नहीं खेल पाए। लेकिन इस दौरान रॉबिन स्मिथ आड़े आ गए और उन्होंने 121 रनों की नाबाद पारी खेल कर इंग्लैंड को पहली इनिंग्स में 519 रनों तक पहुंचा दिया। भारत की ओर से नरेंद्र हीरवानी ने 4 और अनिल कुंबले में 3 विकेट लिए।
भारत की पहली पारी की शुरुआत बहुत ठीक नहीं रही और पहला विकेट 25 रनों पर गिर गया। सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू 13 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद रवि शास्त्री भी बहुत देर तक नहीं टिक पाए और वह 25 रन बनाकर चलते बने। इसके बाद मिडल ऑर्डर में संजय मांजरेकर और कप्तान अजहरुद्दीन ने टीम इंडिया के संभाला। मांजरेकर ने 93 रनों की पारी खेली वहीं अजहर ने 179 रन बनाए। इस दौरान छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे सचिन ने 68 रनों की पारी खेली। भारत ने अपनी पहली पारी में 432 रन बनाए। इंग्लिश टीम की ओर से एंगस फ्रेजर ने सबसे अधिक 5 विकेट लिए।
इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी में भी शानदार प्रदर्शन किया। दूसरी इनिंग्स में इंग्लैंड की तरफ से एलन लैंब ने 109 रन बनाए। इसके अलावा माइक अथर्टन 74 और रॉबिन स्मिथ ने नाबाद 61 रनों की पारी खेली। इस तरह इंग्लैंड ने अपनी दूसरी इनिंग्स में 4 विकेट पर 320 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। इस तरह इंग्लैंड ने भारत को टेस्ट मैच जीतने के लिए 408 रनों का लक्ष्य दिया।
408 रनों का टारगेट हासिल करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत काफी खराब रही और पहला विकेट 4 रनों पर धराशायी हो गया। पारी का आगाज करने आए नवजोत सिंह सिद्धू खाता नहीं खोल पाए। मध्यक्रम में संजय मांजरेकर और दिलीप वेंगसरकर कुछ देर तक संघर्ष किया। मांजरेकर 50 रन बनाकर आउट हुए जबकि वेंगसरकर ने 32 रनों की पारी खेली। पहली पारी में मैराथन इनिंग्स खेलने वाले अजहरुद्दीन कुछ खास नहीं कर पाए और वह 11 रन बनाकर आउट हो गए।
इसके बाद छठे नंबर पर सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने आए। टीम इंडिया को उनसे काफी उम्मीदें थीं। उन्होंने कपिल देव के साथ भारतीय पारी को आगे बढ़ाया। कपिल 26 रन बनाकर आउट हुए। कपिल के बाद बल्लेबाजी करने आए मनोज प्रभाकर ने सचिन का बेहतरीन साथ दिया। वह 67 रन बनाकर नाबाद रहे। इस दरम्यान सचिन ने 189 गेंदों का सामना करते हुए 119 रनों की पारी खेलकर इतिहास रच दिया। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक था। उनकी इस बेहतरीन बल्लेबाजी के चलते भारत यह मुकाबला ड्रॉ कराने में सफल रहा। इसके बाद तेंदुलकर ने फिर कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। आज भी सचिन के नाम टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक और सबसे अधिक मैच खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है।