सैमसन ने कहा, ‘खेल मेरे खून में है। मेरे पिता भी खिलाड़ी रहे हैं, लिहाजा हर झटके के बाद वापसी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। खुद पर मेहनत करते रहो और मजबूती से वापसी का प्रयास करो।
भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने कहा कि पिछले तीन से चार महीने उनके लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन उन्होंने खुद पर काफी मेहनत की और पहला वनडे शतक बनाकर वापसी कर सके।
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भारत में इस साल हुए वनडे विश्वकप के लिए सैमसन टीम में शामिल नहीं किया गया था क्योंकि चयनकर्ताओं ने ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव को तरजीह दी। केरल के संजू ने कहा, ‘पिछले तीन से चार महीने मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण थे। उन सबसे गुजरकर यहां आकर शतक जमाना काफी बड़ी बात है। मैं बहुत खुश हूं।’ सैमसन को एशियाई खेलों के लिए भी टीम में नहीं चुना गया था।
सैमसन ने कहा, ‘खेल मेरे खून में है। मेरे पिता भी खिलाड़ी रहे हैं, लिहाजा हर झटके के बाद वापसी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। खुद पर मेहनत करते रहो और मजबूती से वापसी का प्रयास करो। मैं स्कोर कार्ड देख ही नहीं रहा था। मैं सिर्फ गेंद को देखकर उसके हिसाब से खेल रहा था। मेरा ध्यान प्रक्रिया और गेंद दर गेंद फोकस करने पर था। तिलक वर्मा के आने के बाद पहले चार से पांच ओवर कठिन रहे, लेकिन उसके बाद हम सहज होकर खेले।’
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वनडे टीम के कप्तान लोकेश राहुल ने सैमसन को लेकर कहा "मैं संजू के लिए खुश हूं। उसने इतने साल आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है। दुर्भाग्य की बात है कि हम उसे तीसरे नंबर पर मौका नहीं दे पा रहे। इस क्रम पर हमारे पास वनडे में दिग्गज खिलाड़ी हैं, लेकिन मुझे खुशी है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसने मौकों को भुनाया। अब हमारा ध्यान टेस्ट सीरीज पर है।"