भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव जय शाह को आईसीसी चेयरमैन बनने के बाद भारतीय बोर्ड में अपना पद छोड़ना होगा। बोर्ड की आमसभा की बैठक अगले महीने या अक्तूबर में होगी। शाह को मंगलवार को निर्विरोध आईसीसी का अगला अध्यक्ष चुना गया है। उनका कार्यकाल एक दिसंबर से शुरू होगा। जब कोई शाह के पांच साल के कार्यकाल को देखता है तो उन्हें दो साल (2020 और 2021) के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरना पड़ा जब कोविड-19 ने दुनिया को हिलाकर रख दिया और सब कुछ थम गया। हालांकि, ऐसे समय में भी शाह ने सफलतापूर्वक आईपीएल का आयोजन कराया था।
डब्ल्यूपीएल की शुरुआत सबसे बड़ी उपलब्धि
आईपीएल के दौरान बायो-बबल के निर्माण की देखरेख करना, उन बबल के भीतर चिकित्सा टीम बनाकर पॉजिटिव मामलों को संभालना और टूर्नामेंटों का पूर्ण आयोजन सुनिश्चित करना उन बाधाओं में शामिल था जिसे जय शाह ने पार किया। हालांकि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की शुरुआत होगी। उनकी अगुआई में डब्ल्यूपीएल के लगातार दो सफल सत्र का आयोजन हुआ और सोने पर सुहागा यह रहा कि महिला टी20 क्रिकेट में यह लीग सबसे अधिक राशि के अनुबंध दे रही है। उनके पूर्ववर्तियों ने महिला क्रिकेट के इस पहलू को नजरअंदाज किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को समान मैच फीस (प्रति टेस्ट 15 लाख रुपये, प्रति वनडे आठ लाख रुपये और एकादश में शामिल खिलाड़ियों के लिए प्रति टी20 मैच चार लाख रुपये) देकर समानता सुनिश्चित करने का उनका निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम था।
एक और नीतिगत निर्णय टेस्ट क्रिकेट को प्रोत्साहन देना रहा। भारत इस साल 10 टेस्ट मैच का सत्र खेलेगा और अगर रोहित शर्मा तथा विराट कोहली सभी मैच खेलते हैं तो उन्हें छह करोड़ रुपये (प्रति मैच 60 लाख रुपये जिसमें 45 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि शामिल है) की मैच फीस मिलेगी। यह उनके ए प्लस के केंद्रीय रिटेनरशिप अनुबंध से मात्र एक करोड़ रुपये कम है।
खिलाड़ियों के साथ तालमेल बैठाने में रहे सफल
जय शाह खिलाड़ियों के साथ तालमेल बैठाने में भी सफल रहे और कई मौकों पर कप्तान रोहित शर्मा के समर्थन में खड़े दिखे। इसके अलावा स्टार बल्लेबाज विराट कोहली हों या गेंदबाजी आक्रमण के अगुआ जसप्रीत बुमराह हों या फिर ईशान किशन और हार्दिक पांड्या जैसे दूसरी पंक्ति के खिलाड़ी हों, वह उन सभी के साथ तालमेल बैठाने में कामयाब रहते हैं जो चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए। रोहित ने तो इसी साल वेस्टइंडीज में भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद शाह को तीन स्तंभ में से एक करार दिया जिसके कारण यह जीत संभव हुई। हालांकि, उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सबक भी सिखाया जिनके बारे में माना जाता था कि वे घरेलू क्रिकेट को नजरअंदाज करके आईपीएल की दौलत के पीछे भाग रहे हैं। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर दोनों ने घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता नहीं देने के कारण अपने केंद्रीय अनुबंध गंवा दिए थे।
शाह की एक और उपलब्धि नए राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) का निर्माण है जो एक उत्कृष्टता केंद्र हैं जहां घरेलू सत्र के दौरान एक ही स्थल पर कई प्रथम श्रेणी मैचों का आयोजन किया जा सकता है।