नीलामी की राशि एक साल के लिए होती है, यानी अगर किसी खिलाड़ी को 14 करोड़ रुपये में खरीदा जाता है तो उसे ये वह रकम हर साल मिलेगी और उसे तीन साल तक 42 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अगर कोई खिलाड़ी पूरे सीजन में टीम के साथ उपलब्ध रहता है, तो उसे पूरी राशि का भुगतान किया जाता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि वह खिलाड़ी कितने मैच में खेला है। उदाहरण के लिए साल 2013 में मुंबई इंडियंस का हिस्सा रहे ग्लेन मैक्सवेल को तब सिर्फ तीन ही मैच खेलने का मौका मिला था, लेकिन उन्हें सैलरी के रूप में उनकी पूरी रकम मिली थी।
हालांकि अगर कोई खिलाड़ी सीजन शुरू होने से पहले ही चोटिल हो जाता है, तो फ्रेंचाइजी उसे कोई भी रकम नहीं चुकाती। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी सीजन में कुछ निश्चित मैचों के लिए उपलब्ध है, तो इसके लिए आम तौर पर कुल रकम का दस प्रतिशत पैसा खिलाड़ी को दिया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई खिलाड़ी टीम कैंप में रिपोर्ट करता है और सीजन शुरू होने से पहले चोटिल हो जाता है और आगे एक भी मैच में हिस्सा नहीं लेता है, तो वह नीलामी की रकम का 50 फीसदी पैसा पाने का हकदार है। इस मामले में मोहम्मद शमी और ड्वेन ब्रावो को इसका फायदा मिल चुका है। अगर कोई खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान चोटिल हो जाता है, तो फ्रेंचाइजी उसके इलाज का पूरा खर्च उठाती है।