हालांकि, इस फैसले ने सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा कर दिया। कुछ इस फैसले के पक्ष में हैं और कुछ इस फैसले के खिलाफ हैं। आइए जानते हैं नियम इसको लेकर क्या कहते हैं...
क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलेबोन क्रिकेट क्लब का वाइड को लेकर कई नियम हैं। एमसीसी के आर्टिकल 22.1.1 के मुताबिक, एक गेंद को स्ट्राइकर से दूर माना जाएगी, जब तक कि वह नॉर्मल क्रिकेट शॉट खेलने के लिए उसकी पहुंच के भीतर न हो। हालांकि, आईसीसी ने पिछले साल क्रिकेट के छोटे प्रारूप को ध्यान में रखते हुए वाइड के नियम में कुछ बदलाव किए थे। दरअसल, टी20 में कई बार ऐसा हुआ कि अंपायर ने उस गेंद को भी वाइड करार दिया, जब गेंदबाज बैटर के ऑफ साइड या लेग साइड शिफ्ट होने पर ऑफ स्टंप के बाहर या लेग स्टंप के बाहर गेंद फेंकता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए वाइड के लिए बनाए गए नियम 22.1 में संशोधन किया गया था। इसमें संशोधन यह किया गया कि किसी गेंद को वाइड करार देने से पहले फील्ड अंपायर बल्लेबाज के शॉट लगाने के दौरान की पोजीशन को भी ध्यान रखेंगे। केवल विकेट से गेंद की दूरी को ही मानकर किसी गेंद को वाइड नहीं करार दिया जाएगा।
वनडे क्रिकेट में सामान्य परिस्थिति में गेंद तब वाइड होती है, जब लेग स्टंप के बाहर पिच होती है और बाहर की तरफ जा रही होती है। हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी है। अगर बल्लेबाज अपनी जगह से हिलता हुआ दिखाई पड़ता है और इसके बावजूद गेंद लेग स्टंप के बाहर चली जाती है। अंपायर तब यह ध्यान देते हैं कि उस बल्लेबाज का पहले जो स्टांस था, उसके मुताबिक गेंद उससे टकराती या नहीं। अगर गेंद उससे टकराती तो फिर उसे वाइड करार नहीं दिया जाता है। आसान भाषा में समझें तो बल्लेबाज अपनी जगह से हिलकर शॉट खेलने की कोशिश करता है तो फिर लेग स्टंप के बाहर की गेंद भी वाइड नहीं होती है।
नसुम के खिलाफ भी विराट का स्टांस लेग स्टंप से बाहर चौथे स्टंप के पास था। नसुम के गेंद फेंकते ही विराट के फुटवर्क में बदलाव होता है और वह अपनी बाईं पैर को तीसरे स्टंप की ओर ले जाते हैं। यानी वह ऑफ स्टंप की तरफ मूव कर रहे थे। अंपायर कैटलबॉरो के नजरिये से अगर कोहली गेंद को खेलने के लिए अपनी जगह से नहीं हिलते तो वह बॉल उनके पैर पर जा लगती। इसलिए उन्होंने वाइड नहीं देने का फैसला किया।