मैच के बाद नुरुल हसन ने बुधवार को कहा कि मैदानी अंपायरों ने विराट कोहली की 'फेक फील्डिंग' को नजरअंदाज कर दिया। नुरुल ने जिस घटना का जिक्र किया है वह बांग्लादेश की पारी के सातवें ओवर के दौरान हुआ था। कोहली ने ऐसा दिखावा किया था कि वह डीप से अर्शदीप सिंह के थ्रो को कैच करके नॉन-स्ट्राइकर के एंड पर फेंक रहे हों। वह गेंद नहीं पकड़ पाए थे। न तो अंपायर मरैस इरास्मस और न ही क्रिस ब्राउन ने इसे देखा। यहां तक कि बल्लेबाज भी इसे नहीं देख पाए।
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नुरुल ने क्या-क्या कहा?
नुरुल ने संवाददाताओं से कहा, ''अगर फैसला बांग्लादेश के पक्ष में जाता तो स्थिति कुछ और हो सकती थी। निश्चित रूप से मैदान गीला था और इसका प्रभाव सभी ने देखा। उस थ्रो को लेकर मुझे लगा कि वह नकली था। हमने इस बारे में चर्चा की थी। अगर पांच जुर्माना उनके ऊपर लगाया जाता तो मैच हमारे पक्ष में होता, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ।''
नो-बॉल को लेकर भी हुआ था बवाल
इस मैच में एक और घटना भारतीय पारी के समय घटी थी। 16वें ओवर में विराट कोहली बल्लेबाजी कर रहे थे। गेंदबाजी लाइन पर हसन महमूद थे। उन्होंने एक बाउंसर की। इस पर कोहली ने बल्ला लगाते हुए एक रन ले लिया। उन्होंने इसके बाद अंपायर से नो-बॉल की मांग की। विराट के इशारा करते हुए अंपायर ने नो-बॉल दे दिया। इस पर बांग्लादेशी कप्तान शाकिब अल हसन नाराज हो गए। वह अंपायर की ओर जाने लगे। इतने में कोहली उनके रास्ते में आ गए और उन्हें पकड़ लिया। शाकिब का गुस्सा समाप्त हो गए। दोनों फिर हंसते हुए दिखाई दिए।
मैच में क्या हुआ?
बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। भारत ने 20 ओवर में छह विकेट पर 184 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश ने सात ओवर में बिना किसी नुकसान के 66 रन बना लिए थे। तभी बारिश आ गई। उस समय भारत मैच में डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर 17 रन से पीछे था। अगर मैच नहीं होता तो बांग्लादेश की टीम जीत जाती। ऐसे में भारत के लिए सेमीफाइनल की राह मुश्किल हो जाती।
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हालांकि, बारिश ने टीम इंडिया पर मेहरबानी की और मैच दोबारा से शुरू हुआ। जब मुकाबला फिर से शुरू हुआ तो सारे समीकरण बदल गए। बांग्लादेश को जीत के लिए 16 ओवर में 151 रन का लक्ष्य मिला। इस तरह उसे नौ ओवर में 85 रनों की आवश्यकता थी, लेकिन बांग्लादेश की टीम 16 ओवर में छह विकेट पर 145 रन ही बना सकी। उसे डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर पांच रन से हार मिली।