भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक में अपने-अपने देश के लिए पदक जीते। इस जीत के बाद दोनों खिलाड़ी एक दूसरे से बात करते दिखे थे। इन तस्वीरों को देखकर पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह खुश हुए और उनका मानना है कि इन दोनों खिलाड़ियों के बीच भाईचारा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि खेल सीमाओं से पर है और लोगों को एकजुट करता है।
पाकिस्तान के नदीम ने गुरुवार को पेरिस ओलंपिक में 92.97 मीटर के शानदार ओलंपिक रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि गत चैंपियन नीरज चोपड़ा ने सत्र के सर्वश्रेष्ठ 89.45 मीटर के साथ रजत पदक जीता। नीरज दो ओलंपिक में पदक जीतने वाले आजाद भारत के पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट हैं।
'नीरज-नदीम ने अच्छा संदेश दिया'
हरभजन ने कहा, ‘‘हमने कुछ अच्छी फोटो देखीं जिसमें प्रतियोगिता खत्म होने के बाद हुए समारोह के बाद नीरज और नदीम एक दूसरे से बात कर रहे थे। दोनों ने अपने अपने देश का ध्वज पकड़ा हुआ था और खिलाड़ी के तौर पर दोनों एक दूसरे का सम्मान कर रहे थे। इससे पता चलता है कि खेल किसी भी सीमा से परे है और खेल सभी को एकजुट करता है। इन दोनों ने बहुत अच्छा संदेश दिया है। यह भारत-पाकिस्तान जैसा है। जब हम क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते थे तो हम मैदान पर बहुत प्रतिस्पर्धी होते थे लेकिन जब मैदान के बाहर की बात आती तो हमारे बीच अच्छा रिश्ता है।
नीरज की मां के बयान को सराहा
हरभजन ने नीरज चोपड़ा की मां के बयान का भी जिक्र किया। इस 44 वर्षीय पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा, नीरज की मां ने बहुत अच्छा बयान दिया कि स्वर्ण विजेता नदीम भी किसी मां का बेटा है और वह भी बेटे जैसा है। इसलिए इस तरह का बयान आना अच्छा है और जाहिर तौर पर खेल इससे परे की चीज है। नदीम को स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई। नीरज हमारा गौरव है, हमारे नायक हैं।
विनेश को अयोग्य ठहराए जाने से निराश हुए हरभजन
हरभजन ने पहलवान विनेश फोगाट को 100 ग्राम अधिक वजन के कारण 50 किग्रा स्वर्ण पदक मुकाबले से अयोग्य घोषित किए जाने पर भी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, यह देखना बहुत निराशाजनक और दुखद है कि विनेश सिर्फ इसलिए फाइनल नहीं खेल पाई क्योंकि उसका वजन 100 ग्राम अधिक था। अगर आप देखें तो 100 ग्राम कुछ भी नहीं है लेकिन ओलंपिक में नियम ऐसे हैं और ये सभी खिलाड़ियों के लिए समान हैं। वह बहुत कुछ झेल रही होगी। हम केवल इतना कह सकते हैं कि हम इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े हैं और उम्मीद है कि वह इससे उबर जाएगी क्योंकि किसी के लिए भी इससे गुजरना बहुत मुश्किल है। वह स्वर्ण पदक के बिल्कुल करीब थी। उसे स्वर्ण पदक के साथ नहीं देखना बहुत निराशाजनक है लेकिन वह हमारा स्वर्ण पदक है, वह हमारा गौरव है, वह देश की नायिका हैं।