वहीं, दूसरी तरफ आईसीसी की विवाद समाधान समिति अगर इस बात को समझ लेती है कि भारतीय खिलाड़ियों के खेलने के इनकार को लेकर इंग्लैंड को वॉकओवर दिया गया। ऐसी स्थिति में इंग्लैंड को जीत मिलेगी और सीरीज 2-2 की बराबरी पर खत्म होगी। ईसीबी के सीईओ हैरिसन ने शुक्रवार को मैच रद्द होने के बाद कहा था कि भारतीय टीम ने कोरोना के प्रकोप से नहीं, बल्कि इसको लेकर चिंता और मानसिक दबाव के चलते फील्ड पर न उतरने का फैसला किया था। वहीं, बीसीसीआई ने बयान जारी कर कहा था, 'बीसीसीआई ने ईसीबी के साथ संयुक्त रूप से भारत के इंग्लैंड दौरे में मैनचेस्टर में होने वाले पांचवें टेस्ट मैच को रद्द करने का फैसला किया है।
बीसीसीआई ने ईसीबी को रद्द किए गए टेस्ट मैच के पुनर्निर्धारण की पेशकश की है। दोनों बोर्ड इस टेस्ट मैच को फिर से शेड्यूल करने के लिए एक विंडो खोजने की दिशा में काम करेंगे।' बोर्ड ने बयान में आगे कहा, 'बीसीसीआई ने हमेशा कहा है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और भलाई सर्वोपरि है। इससे हम समझौता नहीं करेंगे। बीसीसीआई, ईसीबी को इस कठिन समय में सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहता है। एक रोमांचक सीरीज को पूरा नहीं कर पाने के लिए हम प्रशंसकों से माफी मांगना चाहते हैं।'
उधर, इन सारी उथल-पुथल के बीच बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली ने ब्रिटेन जाने का फैसला किया है। गांगुली 22 और 23 सितंबर को अपने दौरे के दौरान ईसीबी के सीईओ हैरीसन से मिलेंगे। वह इस दौरान इकलौते टेस्ट मैच के आयोजन और समय को लेकर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, गांगुली का यह दौरा आधिकारिक नहीं बल्कि निजी होगा। गांगुली चर्चा के दौरान ईसीबी को हुए 400 करोड़ रुपये के नुकसान पर बात कर सकते हैं। मैच के रद्द होने से ईसीबी को 300-400 करोड़ का नुकसान होने की उम्मीद है, इसमें प्रसारकों के 300 करोड़ तो टिकट पर 100 करोड़ का नुकसान हो सकता है।