आखिरी गेंद तक चला मैच
एक समय भारतीय टीम आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर जीत का जश्न मनाने लगी थी जब झूलन की गेंद पर मूनी का कैच लपक लिया गया लेकिन तीसरे अंपायर ने कई बार रिप्ले देखकर कमर से ऊपर के फुलटॉस गेंद होने के कारण इसे नो बॉल करार दिया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को आखिरी गेंद पर दो रन की दरकार थी, जिसे निकोल केरी ने हासिल कर लिया।
आखिरी ओवर में जीत के लिए चाहिए थे 13 रन
ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए आखिरी ओवर में 13 रन की जरूरत थी और गेंद भारत की अनुभवी गेंदबाज झूलन गोस्वामी के हाथ में थी। लेकिन झूलन के दो नो बॉल ने ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत की राह आसान कर दी. मूनी ने निकोल केरी (38 गेंद में नाबाद 39) के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए नाबाद 97 रन की साझेदारी की। एक समय ऑस्ट्रेलियाई टीम 52 रन पर चार विकेट गंवाकर मुश्किल में थी लेकिन मूनी ने ताहलिया मैकग्रा (77 गेंद में 74 रन) के साथ 126 रन की साझेदारी कर जीत की नींव रखी।
स्मृति-शेफाली ने भारत को दिलाई ठोस शुरूआत
टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद मंधाना और शेफाली वर्मा (22) ने पहले पावरप्ले (शुरुआती 10 ओवर) में 68 रन बनाकर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। इस साल खेले गए 10 एकदिवसीय मैचों में यह दोनों की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी रही।
चौथे विकेट के लिए अच्छी साझेदारी
मंधाना ने इसके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज रिचा घोष (44) के साथ भी चौथे विकेट के लिए 76 रन की शानदार साझेदारी की। रिचा ने 50 गेंद की पारी में तीन चौके और एक छक्का जड़ा। भारत की ओर से पूजा वस्त्राकर ने 29 और झूलन गोस्वामी ने नाबाद 28 रन बना कर अच्छा योगदान दिया। शानदार लय में चल रही कप्तान मिताली राज (8) मंधाना के साथ गफलत का शिकार होकर रन आउट हो गई। भारतीय टीम कम अंतराल में तीन विकेट गंवाने के बाद परेशानी में थी लेकिन मंधाना और रिचा की शानदार साझेदारी ने टीम को मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकाला। दोनों ने रन गति बनाए रखी और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को हावी होने का मौका नहीं दिया। पूजा और झूलन ने आखिरी ओवरों में 53 रन की साझेदारी कर टीम के स्कोर को 250 के पार पहुंचाया। झूलन ने इस दौरान आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 25 गेंद की नाबाद पारी में तीन चौके लगाए। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ताहलिया मैकग्रा ने 45 रन देकर तीन विकेट लिए जबकि मोलिनेक्स ने दो विकेट झटके।