वर्ष 1919 में रवींद्रनाथ को महात्मा गांधी की एक चिट्ठी मिली, जिसमें अंग्रेजों से मोहभंग और रॉलेट ऐक्ट के खिलाफ विरोध की जरूरत के बारे में बताया गया था। रवींद्रनाथ का जवाब मिला-जुला था। जहां वह रॉलेट ऐक्ट के विरोध की जरूरत पर गांधी जी से सहमत थे, वहीं उन्हें तत्कालीन स्थितियों में नस्लीय घृणा और नफरत की भावना तेज होने का भी डर था। रॉलेट ऐक्ट के पारित होने के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन का एक नया चरण शुरू हुआ और गांधी जी ने इसे निरस्त करने के लिए सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।
नौ अप्रैल को कोलकाता, अमृतसर, मुंबई और अहमदाबाद में पुलिस ने गोलीबारी की। महात्मा गांधी मुंबई से दिल्ली आने को तैयार थे, पर पुलिस ने उन्हें मुंबई में रहने के लिए मजबूर किया। लोगों को इस बात की जानकारी मिल गई। 10 अप्रैल को डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ सत्यपाल को गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया। विरोध में लोगों ने जिलाधिकारी के बंगले का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं।