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खिलौना उद्योग का भविष्य

जयंतीलाल भंडारी
Updated Mon, 15 Mar 2021 07:40 AM IST
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खिलौना... - फोटो : iStock

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले ‘खिलौना मेला 2021’ का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए कहा कि खिलौना उद्योग का विकास करके देश न केवल खिलौना उत्पादन में आत्मनिर्भर बन  सकता है, बल्कि वैश्विक बाजार की जरूरतें पूरी करने के लिए तेजी से आगे बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक खिलौना उद्योग अभी करीब 7.20 लाख करोड़ रुपये का है।



इसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग नगण्य है। भारत अपने खिलौनों की मांग का करीब 85 फीसदी आयात करता है। लेकिन अब भारतीय खिलौना बाजार के तेजी से बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे हैं।


द इंटरनेशनल मार्केट एनालिसिस रिसर्च ऐंड कंसल्टिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय भारत में खिलौना बाजार लगभग 12,000  करोड़ रुपये का है, जो वर्ष 2024 में 24,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।


वस्तुतः पिछले वर्ष कोरोना संकट की चुनौतियों के बीच सरकार 'वोकल फॉर लोकल' व 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत खिलौना उद्योग को अधिकतम प्रोत्साहन देने तथा खिलौना बाजार से चीन के खिलौनों को हटाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ी है। अब देश का खिलौना उद्योग सरकार की प्राथमिकता में आ गया है, जो खिलौना कारोबार के लिए शुभ संकेत है।


सरकार की रणनीति है कि सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि वैश्विक खिलौना बाजार में भी भारतीय खिलौनों की छाप दिखाई दे। खिलौना उत्पादकों से कहा गया है कि वे ऐसे खिलौने बनाएं, जिनमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत की झलक हो और उन खिलौनों को देख दुनिया वाले भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के प्रति गंभीरता जताएं और भारतीय मूल्यों को समझ सकें।


सरकार ने खिलौना उद्योग को देश के 24 प्रमुख सेक्टर में स्थान दिया है। भारतीय खिलौनों को वैश्विक खिलौना बाजार में बड़ी भूमिका निभाने हेतु खिलौना उद्यमियों को प्रेरित किया जा रहा है। सरकार की बुनियादी नीति में एक बड़ा परिवर्तन यह आया है कि अब सरकार भारतीय खिलौनों को प्रोत्साहित करते हुए विदेशी खिलौनों की निर्भरता कम करने और भारतीय क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और के लिए जुट गई है।


केंद्र एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा स्थानीय खिलौना उद्योग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। फरवरी, 2020 में, खिलौना आयात के शुल्क में 200 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा एक सितंबर, 2020 से आयात किए जाने वाले खिलौनों के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैडर्ड के मापदंड लागू कर दिए गए हैं।
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स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सरकार द्वारा खिलौनों पर लगाए गए आयात प्रतिबंधों से चीनी खिलौनों की आवक धीमी हो गई है। इससे जहां स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिल रहा है, वहीं खिलौना उद्योग में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ गए हैं।


इससे खिलौनों के आयात पर कम विदेशी मुद्रा तो खर्च होगी ही, वैश्विक बाजार में निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा की नई कमाई भी बढ़ाई जा सकेगी। देश के खिलौना सेक्टर में लंबे समय से चली आ रही बाधाएं हटाया जाना जरूरी है। इसमें अपेक्षित विकास हेतु इस उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए उपयुक्त लाभप्रद नीति तैयार की जानी चाहिए।


खिलौना उद्योग से संबंधित विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी है। चूंकि खिलौना निर्माण इकाई के लिए उत्पादन के साथ उत्पादों के भंडारण और पैकिंग के लिए पर्याप्त भूमि की \ जरूरत होती है, अतएव भूमि संबंधी जरूरत की उपयुक्त पूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।


साथ ही, एक सुगठित डिजाइन संस्थान की स्थापना भी आवश्यक है, ताकि कारीगरों के कौशल प्रशिक्षण के साथ डिजाइन और नवाचारों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। इसके अलावा उद्योगों के लिए जरूरी ऋण तथा वित्तीय सहायता संबंधी बाधाएं दूर करनी होंगी।


खिलौना उद्योग को जीएसटी संबंधी मुश्किलों से भी राहत देने की जरूरत है, जिससे कि इस उद्योग को तेजी से बढ़ाया जा सके। यदि चीन की तरह भारत में भी टॉय क्लस्टर को प्रोत्साहन मिले तो, न केवल खिलौनों के आयात में कमी तथा निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि इससे होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई से अर्थव्यवस्था भी लाभान्वित हो सकेगी।

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