वित्तीय समावेशन की सफलता का आकलन इससे हो सकता है कि सरकार द्वारा इस संबंध में बनाई जा रही नीतियों का लाभ समाज के हर तबके, और मुख्यतः अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंच रहा है। हालांकि देश में अब भी गरीबी रेखा से नीचे जीने वाली आबादी करीब 22 फीसदी है। लेकिन इसमें सुधार का बड़ा कारण वित्तीय समावेशन ही है। नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में वित्तीय समावेशन के क्रियान्वयन में सुधार हुआ है। इसका कारण विभिन्न वित्तीय योजनाओं को डिजिटल मंच पर ले जाना है। जन-धन योजना ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
शुरुआत में इसे लेकर कई सवाल थे, पर अब इसका फायदा दिख रहा है। जन-धन योजना में करीब 40 करोड़ खाते खोले गए, जिनमें 22 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं। मनरेगा हो या अन्य वित्तीय लाभ, इन खातों में अब सब्सिडी का पैसा सीधे केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा हस्तांतरित किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है। कोविड-19 के दौरान सहायता देने के उद्देश्य से अप्रैल से जून के बीच महिलाओं के बैंक खातों में करीब 30,000 करोड़ रुपये सीधे स्थानांतरित किए गए। कुछ अन्य योजनाओं में विभिन लाभार्थियों के बैंक खातों में करीब 90,000 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए। सरकार ने आधार कार्ड से खातों को जोड़कर खाता खोलने की कार्यविधि आसान कर दी है।
खाते खुल जाने से देश के करोड़ों हितग्राही वित्तीय समावेशन से जुड़ी सरकारी योजनाओं का सीधे लाभ ले रहे हैं। देश में कृषि का क्षेत्र सिल्वर लाइनिंग के तौर पर देखा जाता है एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अधिकतम पैसा किसानों के हाथों में पहुंचाया जा रहा है। केंद्र द्वारा हाल ही में घोषित की गई नीतियों का असर भी दिखने लगा है। जून में समाप्त तिमाही में, जब महामारी के चलते आर्थिक गतिविधियां लगभग बंद थीं, तब कृषि क्षेत्र से निर्यात में 23.24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खरीद की ताकत आई है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में दोपहिया एवं कम कीमत वाले चार पहिया वाहनों की मांग में वृद्धि है। जल जीवन मिशन के तहत गावों के लोगों तक पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इन सभी प्रयासों से भी देश के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन की स्थिति में और अधिक सुधार होगा।
देश में अब विकास के लिए नए-नए क्षेत्र भी तलाशे जा रहे हैं। जैसे, तटवर्तीय इलाकों में सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इससे उन इलाकों में आधारभूत सुविधाओं का विकास होगा। पूरे देश को मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी ढांचे से जोड़ने की बड़ी योजना तैयार की गई है, जो रेल-सड़क-बंदरगाह को आपस में जोड़ेगी। प्रवासी मजदूरों के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया गया है। केंद्र सरकार प्रयास कर रही है कि देश में गरीब तबका किस प्रकार आगे बढ़े। आय में असमानता कम करने के अधिकतम प्रयास होने चाहिए। इसका उद्देश्य यही होगा कि देश का समग्र विकास हो, अधिक से अधिक किसान समृद्ध और आर्थिक रूप से मजबूत हों, ताकि देश के आर्थिक पहिये की गति तेज हो सके। इन सभी उपायों से देश में वित्तीय समावेशन की स्थिति में और अधिक सुधार होगा।
वित्तीय समावेशन में एक दूसरा पहलू नागरिकों के बीच वित्तीय साक्षरता की पहुंच होना भी है। इस मामले में हमारा देश अभी बहुत पीछे है। आम नागरिक अब भी बैंक खातों एवं बीमा योजनाओं का सही मतलब नहीं समझ पाता। शेयर बाजार के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। इसके लिए हम सभी ज़िम्मेदार हैं क्योंकि इस ओर अभी तक हमने बहुत गंभीरता से ध्यान ही नहीं दिया। वित्तीय समावेशन का अधिक से अधिक लाभ तभी मिल सकता है, जब वित्तीय साक्षरता की दर शीर्ष पर हो। केंद्र में मोदी सरकार ने वित्तीय समावेशन के एक पहलू को देश में सफलतापूर्वक लागू किया है। लेकिन इसके दूसरे पहलू अर्थात वित्तीय साक्षरता को और मजबूत किए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए। तभी वित्तीय व्यवस्था में अधिकतम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।