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आसमान में तारे साफ दिखाई देने लगे हैं

नलिनी-कमलिनी, मशहूर कथक नृत्यांगना Published by: योगेश साहू Updated Wed, 29 Apr 2020 01:36 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हम तो आजकल ओवर बिजी हैं। हमारा कमरा आजकल स्टूडियो बना हुआ है। इसके अलावा हम एक किताब लिख रहे थे, कई वर्षों से वह काम पूरा नहीं हो पा रहा था, अब उसे भी पूरा कर रहे हैं। जिसके भी कलात्मक भाव होते हैं, वे रुक नहीं पाते हैं, निकलते जाते हैं। इस समय हम बहुत खुश हैं कि हम पढ़-लिख पा रहे हैं। योगाभ्यास का समय नहीं मिल पाता था, उसे कर पा रहे हैं।



जब हम छोटे थे, तब हम पर कोई दायित्व नहीं होता था, तब आठ-आठ घंटे रियाज करते थे। अब फिर से खूब रियाज कर रहे हैं। कार्यक्रमों में जाने की व्यस्तता में अपनी मां को समय नहीं दे पाते थे, अब हमारी मां बहुत खुश हैं कि हम उनके साथ समय बिता रहे हैं। तो आपको जो भी समय मिले, उसका सदुपयोग करें। समय कभी एक-सा नहीं रहता। पर्यावरण के दोहन के बारे में इंसानों को कितना सचेत किया गया, लेकिन वे नहीं माने।


अब प्रकृति ने खुद ही बदलाव कर दिया। अपने गार्डन में लंबे समय बाद हमें अब फिर से कोयल की आवाज सुनाई देने लगी है। आसमान में तारे साफ दिखाई देने लगे हैं। इसके साथ ही लॉकडाउन के समय में अपराध कम हो गए हैं। कोरोना वास्तव में महामारी है, लेकिन इसके कुछ सुखद पहलू भी सामने आए हैं। विज्ञान तो वरदान के साथ अभिशाप भी है, लेकिन कला कभी भी विंध्वसकारी नहीं रही। नृत्य, संगीत या कोई भी कला, प्राकृतिक खान-पान, औषधि कभी भी कोई नुकसान नहीं करेगी, क्योंकि वह प्रकृति की देन है और हम प्रकृति के अंश हैं।


कोई भी कला सोच और मनोवृत्ति को बताती है। हम डांसर हैं, इसलिए हमें पुरानी हिंदी फिल्में बहुत पसंद हैं, क्योंकि उनमें गहराई और भाव होते हैं; पुराने फिल्मी गीत पसंद हैं, क्योंकि वे मनोभावों को छूते हैं। आजकल ‘कुछ नया’ के नाम पर गीत-नृत्य में बस जोड़-तोड़ की जा रही है। लता जी के ओरिजनल गानों के सामने उनके रि-मिक्स नहीं ठहरते, क्योंकि उनमें भाव का अंतर हो जाता है।


हमारे गुरु जी जितेंद्र महाराज हमेशा कहते हैं कि आप किसी भी चीज को पाने के लिए पहले उसके योग्य बनें, तब उसकी इच्छा रखें। इससे आपको कभी मायूसी नहीं होगी। हमने हमेशा ऐसा किया, इसलिए हमें कभी कोई मायूसी नहीं हुई। कर्महीन व्यक्ति नृत्यकार नहीं हो सकता। आप सकारात्मक रहें तो आपको किसी भी संकट में मायूसी नहीं होगी। जब आप कर्म करेंगे, तभी तो आपको इच्छित फल की प्राप्ति होगी।


नृत्य में नवरस की अभिव्यक्ति होती है। हम रात में दो बजे सोते हैं। तब तक खूब चिंतन-मनन चलता रहता है। चिंतन माने परिस्थितियों के बारे में विचार करना और मनन माने आत्ममंथन करना। हम लोग डांसर हैं, हमारा काम ही है- भाव, विचार अभिव्यक्ति। पहले हम विचारते हैं, उस विचार में से भाव उत्पन्न होते हैं और फिर उन भावों की अभिव्यक्ति होती है।


हम इन भावों को लेखन में ढालते हैं, नृत्य में ढालते हैं। तो हमें चिंतन-मनन करने का बेहतरीन अवसर मिला है और हम इस समय का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। पुरानी कंपोजिशन्स को नए ढंग से सजा रहे हैं। संगीत इस समय का सबसे अच्छा साथी है। कला से आत्मसाक्षात्कार होता है, यह आपके जीवन में सुधार लाती है। इसलिए सबको इस समय कलाओं को अपना साथी बनाना चाहिए।
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गूगल से आप ज्ञान तो ले सकते हैं, लेकिन उसका अनुभव नहीं कर सकते। स्वयं अनुभव करने और स्वयं की खोज करने का यह सबसे अमूल्य समय है। नकल की आयु लंबी नहीं होती, असल की होती है- धीरे-धीरे रे मना, धीरे-धीरे सब होय।  यह समय अपने मौलिक विचारों को उत्पन्न करने का है। इसका पूरा लाभ उठाएं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सकारात्मक रूप में श्रम करें।

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