‘एज इज एन इश्यू ऑफ माइंड ओवर मैटर, इफ यू डॉन्ट माइंड, इट डज नॉट मैटर’। -मार्क ट्वेन
यानी उम्र, मानने से ज्यादा समझने की चीज है। अगर आप अपनी उम्र ज्यादा नहीं समझते हैं, तो वह ज्यादा मानी भी नहीं जाएगी। यह बात उन लोगों के संदर्भ में बेहद खरी उतरती है, जिन्होंने उम्र की सीमाओं को लांघकर अपना मुुकाम बनाया है और बना रहे हैं।
हिंदी सिनेमा और रंगमंच की प्रसिद्ध वयोवृद्ध अभिनेत्री जोहरा सहगल ने हाल ही में अपना 101 वां जन्मदिन मनाया है। उम्र के सौ साल पूरे करने के बावजूद भी ‘लाडली ऑफ कंट्री’ अवॉर्ड से सम्मानित यह अभिनेत्री पूरे जज्बे और जज्बातों से लबरेज है।
60 साल पूरे करते ही रिटायरमेंट की सोच रखने वाले लोगों के लिए जोहरा सहगल का नाम किसी मिसाल से कम नहीं है। 90 साल से ज्यादा की उम्र में भी जोहरा ने ‘वीर-जारा’ और ‘हम दिल दे चुके सनम’ जैसी फिल्मों में अपनी भूमिका के लिए काफी चर्चा बटोरी।
इस फेहरिस्त में एक और नाम जोड़ना बहुत जरूरी है। यह नाम है इडा पोल्लाक। ब्रिटेन की इस उपन्यासकार का नाम दुनिया के सबसे उम्रदराज उपन्यासकारों की सूची में शुमार है।
हाल ही में 105 साल की उम्र में इडा ने अपनी 124वीं किताब पेश कर अपने प्रशंसकों को खुश होने का मौका दिया और दुनिया भर के लोगों को हैरान होने का एक अनोखा अवसर।
साउथ लंदन के लेवाइसहेम में जन्मीं इडा ने अपना पहला थ्रिलर उपन्यास ‘द हिल्स ऑफ रॉवेन हॉन्ट’ 14 साल की उम्र में लिखा था।
14 साल से 105 साल के इस सफर में उम्र ने शायद कई बार उन्हें धोखा दिया होगा, लेकिन अब वह पूरे जोश और जुनून के साथ उम्र को धोखा देने में कामयाब हो रही हैं।
यह शायद उम्र को कुछ न समझने का ही नतीजा है, जिसके बारे में मार्क लिख चुके हैं। उम्र के सामने न थकने का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता।
जब अमेरिका के मशहूर अभिनेता और निर्माता-निर्देशक क्लींट ईस्टवुड अपने दिल की बात बताते हैं तो इस सिलसिले को एक नया मोड़ मिल जाता है। 82 वर्षीय क्लींट 100 साल की उम्र के बाद भी फिल्में निर्देशित करते रहने की योजना बना चुके हैं।
ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल के दौरान क्लींट ने उम्र और सपनों के बीच तालमेल की अपनी योजना के बारे में अपने प्रशंसकों को बताया। क्लींट कहते हैं, ‘मैं आगे के सफर के लिए पूरी तरह तैयार हूं और अगले दो दशक तक फिल्में बनाते रहना चाहता हूं। क्या यह शानदार नहीं है कि आप 105 साल के हैं और फिर भी फिल्म निर्देशित कर रहे हैं?’
ईस्टवुड का इशारा पुर्तगाली निर्देशक मेनोइल डे ओलीविएरा की तरफ था। मेनोइल ने अपनी पहली फिल्म 1927 में बनाई थी। आज भी 104 साल की उम्र में वह फिल्मी दुनिया में पूरी तरह सक्रिय हैं।
बीते माह ही पोर्टो में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान दिया गया उनका वक्तव्य खासा आकर्षण का केंद्र रहा। क्लींट की मानें तो 100 साल की उम्र के बाद तक काम करते रहने का विचार ही सबसे बेहतरीन आशावाद है।