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विश्व साहित्य का आकाश: डेजर्शन-विभाजित जीवन

सार

उपन्यास ‘डेजर्शन’ उन्नीसवीं सदी के अंत में प्रारंभ होता है और बीसवीं सदी के मध्य तक चलता है। तीन खंडों में विभक्त यह उपन्यास भिन्न नस्ल के त्रासद प्रेम, उपनिवेशवाद, प्रवास, विभिन्न संस्कृतियों, मोम्बासा, भारत, इंग्लैंड की बात करता है।
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Books - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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2021 की नोबेल समिति ने अब्दुलरजाक गुरनाह की अनुशंसा में कहा, ‘संस्कृतियों और महादेशों की गह्वर में फंसे शरणार्थियों की नियति और उपनिवेशवाद के प्रभावों की कारुणिक और अडिग व्याख्या के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया जा रहा है।’ समिति ने आगे कहा, अब्दुलरजाक संस्कृति के विस्तार के हिमायती रहे हैं। उन्होंने अपने लेखन में बिना समझौते के महाद्वीपों और संस्कृतियों की खाई में रहने वाले शरणार्थियों की नियति को करुणापूर्ण, गहन सूझ और पैनी दृष्टि के साथ उकेरा है।  

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‘मेमोरी ऑफ डिपार्चर’, ‘पिल्ग्रिम’स वे’, ‘डोटी’, ‘पैराडाइज’, ‘एडमायरिंग साइलेंस’, ‘बाई द सी’, ‘डेजर्शन’,  ‘द लास्ट गिफ्ट’, ‘ग्रेवल हार्ट’ तथा ‘आफ्टरलाइफ’ अब तक गुरनाह के 10 उपन्यास प्रकाशित हैं। कहानियों के अलावा उन्होंने साहित्येतर भी लिखा है, ‘द कैम्ब्रिज कम्पेनियन टू सलमान रुश्दी’, ‘एसेज इन अफ्रीकन लिटरेचर’ तथा ‘टू वॉल्यूम ऑफ एसेज ऑन अफ्रीकन राइटिंग’ प्रमुख कार्य हैं।

उपन्यास ‘डेजर्शन’ उन्नीसवीं सदी के अंत में प्रारंभ होता है और बीसवीं सदी के मध्य तक चलता है। तीन खंडों में विभक्त यह उपन्यास भिन्न नस्ल के त्रासद प्रेम, उपनिवेशवाद, प्रवास, विभिन्न संस्कृतियों, मोम्बासा, भारत, इंग्लैंड की बात करता है। इसमें भारतीय मूल से जुड़े हसनअली, रेहाना हैं, तो मार्टिन पीयर्स, फ्रेडरिक टर्नर जैसे अंग्रेज भी हैं।
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मार्टिन रहमदिल और रोमांटिक है, साहित्य प्रेमी फ्रेडरिक अफ्रीकी जीवन शैली का कटु आलोचक। भारत में रह चुका मार्टिन धड़ल्ले से उर्दू बोलता है। इंग्लिश उसकी भाषा है, फ्रेडरिक स्वाहिली बोलता है, स्थानीय लोगों को अविश्वास और हिकारत के भाव से देखता है। उसे वे उज्जड और चोर दिखते हैं, उसे वहा केवल गंदगी, अशिक्षा नजर आती है। वह उन्हें धमकाता है, चाबुक चलाता है।

उपन्यास में मार्टिन की कहानी

उपन्यास की शुरुआत 1899 में होती है जब एक सुबह अपने गाइड द्वारा लूटे और चोटिल किए जाने के बाद मार्टिन किसी तरह घिसटते हुए एक स्थान पर पहुंच कर बेहोश हो जाता है, उसी समय हसनअली की नजर उस पर पड़ती है। हसनअली की खूबसूरत बहन रेहाना आंगन में पड़े घायल मार्टिन की देखभाल करती है। इंग्लिश ऑफिसर फ्रेडरिक मार्टिन को अपने यहां उठा ले जाता है।

हसनअली और उसकी बहन रेहाना का पिता जकरिया भारत से था और अफ्रीकी नस्ल की मां जुबैदा मोम्बासा से थी। रेहाना का पति आजाद भी भारत से था, वह शादी के बाद भारत लौट गया। रेहाना ने बहुत दिन उसका इंतजार किया था। रेहाना को लोग नाजायज संतान मानते हैं, बचपन में वह अपने लिए स्वाहिली शब्द ‘चोटरा’ (हरामी) सुनती थी, अर्थ नहीं समझती थी। 

कॉमनवेल्थ प्राइज के लिए नामांकित ‘डेजर्शन’ में मार्टिन हसनअली का शुक्रिया अदा करने और फ्रेडरिक के व्यवहार के लिए माफी मांगने उसके घर आता है, वह रेहाना को देखता है, उसके प्रेम में पड़ जाता है। दो संस्कृतियों के प्रेम को समाज स्वीकार नहीं करता है। फिर एक दिन आर्कियालॉजिस्ट मार्टिन मोम्बासा और रेहाना को छोड़ कर चला जाता है। 

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book किताब new - फोटो : istock
उपन्यास का दूसरा भाग

उपन्यास का दूसरा भाग एक दूसरी दुनिया है, जहां बड़ा भाई रशीद, छोटा अमीन और बहन फरीदा है। रशीद माता-पिता के अनुशासन और अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। छोटा भाई अमीन पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चला जाता है। इसी समय तंजनिया गृहयुद्ध में फंस जाता है, अमीन देश नहीं लौट पाता है। वहीं कॉलेज में पढ़ाने लगता है, इंग्लिश स्त्री से शादी करता है। पत्रों के द्वारा उसका संबंध परिवार से बना रहता है। रशीद असल में अब्दुलरजाक गुरनाह ही है।

रशीद एक तलाकशुदा उम्रदराज खूबसूरत स्त्री जमीला से प्रेम करता है।  दूसरे भाग का काफी हिस्सा अमीन की दृष्टि से चलता है। रशीद मां को वचन देता है कि वह जमीला से कभी नहीं मिलेगा और वह इस प्रण का पालन भी करता है। दुनिया बहुत छोटी और गोल है। उपन्यास रेहाना एवं जमीला के तार जोड़ता है। कई साल बाद अमीन भाई के दर्द को अनुभव करता है क्योंकि उसे भी चोट पहुंची है।

एक सेमीनार में ‘रेस एंड सेक्सुआलिटी उन सेटलर राइटिंग इन केन्या’ विषय पर पेपर पढ़ते हुए उसे फिर से प्यार हुआ है। उसे किससे प्यार हुआ है? क्यों वह वापस लौट कर भाई से मिलना चाहता है? पढ़ कर इसे अनुभव करना होगा। उपन्यास में अलगाव है, पलायन है, मरणशील गैरनस्लीय अवैध प्रेम है, बहु-संस्कृतियों का मिलन है। परिवार हैं और परिवार की अपेक्षाएं तथा उसके भयंकर दबाव हैं।

भिन्न नस्लीय प्रेम के विषय में रशीद कहता है, ‘मैं नहीं जानता यह कैसे हुआ।...पर मैं जानता हूं यह हुआ।...मेरी कल्पना मेरा साथ छोड़ देती है और यह मुझे दु:ख से भर देता है।’ 

‘जल्दी-जल्दी’, ‘दुका’ (दुकान), ‘शरबत’, ‘आना’, ‘रुपी’, ‘मिहराब’, ‘रमदान’, ‘समोसा’, ‘जुमा’ जैसे शब्द भारतीय पाठकों को अपनेपन का बोध कराते हैं। उपन्यास में सोहिली, अरबी, हिन्दी, गुजराती के शब्द हैं। उदासी से भरपूर उपन्यास ‘डेजर्शन’ एकाध छींटा हास्य का भी बिखेरता है जैसे हड्डी जोड़ने वाले याहया की कहानी जिसे पीठ पीछे ‘लेगब्रेकर’ पुकारा जाता है। ऑन्ट (मौसी) मरियम चार पति चाहती है ताकि एक से मन भर जाए तो दूसरे को बुला सके। 


बांध के रखने वाली कहानी

तीन पीढ़ियों को समेटती कहानी एक बार शुरू करने पर आप समाप्त किए बिना छोड़ नहीं सकते हैं। स्त्री के प्रति सब समाज एक जैसा नजरिया रखते हैं। लोग जमीला को बुरी स्त्री मानते हैं। आत्मकथात्मक उपन्यास ‘डेजर्शन’ मे आए प्रेम को खुद उपन्यासकार ‘द इम्पीरियल रोमांस’ की संज्ञा देता है। कहानी अफ्रीकी जमीन पर चलती है, वास्तव में कभी समाप्त नहीं होती है। इस उपन्यास के विषय में ‘द न्यू यॉर्कर’ ने लिखा है, ‘अफ्रीका के इतिहास, अलगाव और हानि पर प्रगाढ़ चिंतन।’

इस उपन्यास में पात्र डायरी रखते हैं। रशीद-अमीन की बहन फरीदा जिसे सब बेवकूफ मानते थे उसका काव्य संकलन प्रकाशित होता है। उपन्यास पत्र में भी कहानी को आगे बढ़ाता है। हसनअली का आतिथ्य सत्कार मन को छूता है। उपन्यास जंजीबार में बोहरा गुजराती, गोअन, पुर्तगाली, अरब, ओमानी, ब्रिटिश, सोमाली आदि विभिन्न समुदायों का समागम दिखाता है।

दो वर्जित त्रासद प्रेम और उनका प्रेमियों के परिवार पर असर को दिखाता उपन्यास ‘डेजर्शन’ साहित्य की शक्ति का बेजोड़ उदाहरण है। अब्दुलरजाक गुरनाह मनुष्य की कहानी लिख रहे हैं। गंभीरता से रचे गए गुरनाह के उपन्यास में परित्याग कई रूपों में आता है। इसका पहला भाग उपनिवेश काल में पूर्वी अफ्रीका को उपनिवेशियों की नजर से दिखाता है। दूसरा भाग रशीद, अमीन, फरीदा, जमीला की कहानी कहता है। तीसरा भाग इन कहानियों को जोड़ कर मुकम्मल बनाता है। 
 
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 
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