उपन्यास का दूसरा भाग
उपन्यास का दूसरा भाग एक दूसरी दुनिया है, जहां बड़ा भाई रशीद, छोटा अमीन और बहन फरीदा है। रशीद माता-पिता के अनुशासन और अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। छोटा भाई अमीन पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चला जाता है। इसी समय तंजनिया गृहयुद्ध में फंस जाता है, अमीन देश नहीं लौट पाता है। वहीं कॉलेज में पढ़ाने लगता है, इंग्लिश स्त्री से शादी करता है। पत्रों के द्वारा उसका संबंध परिवार से बना रहता है। रशीद असल में अब्दुलरजाक गुरनाह ही है।
रशीद एक तलाकशुदा उम्रदराज खूबसूरत स्त्री जमीला से प्रेम करता है। दूसरे भाग का काफी हिस्सा अमीन की दृष्टि से चलता है। रशीद मां को वचन देता है कि वह जमीला से कभी नहीं मिलेगा और वह इस प्रण का पालन भी करता है। दुनिया बहुत छोटी और गोल है। उपन्यास रेहाना एवं जमीला के तार जोड़ता है। कई साल बाद अमीन भाई के दर्द को अनुभव करता है क्योंकि उसे भी चोट पहुंची है।
एक सेमीनार में ‘रेस एंड सेक्सुआलिटी उन सेटलर राइटिंग इन केन्या’ विषय पर पेपर पढ़ते हुए उसे फिर से प्यार हुआ है। उसे किससे प्यार हुआ है? क्यों वह वापस लौट कर भाई से मिलना चाहता है? पढ़ कर इसे अनुभव करना होगा। उपन्यास में अलगाव है, पलायन है, मरणशील गैरनस्लीय अवैध प्रेम है, बहु-संस्कृतियों का मिलन है। परिवार हैं और परिवार की अपेक्षाएं तथा उसके भयंकर दबाव हैं।
भिन्न नस्लीय प्रेम के विषय में रशीद कहता है, ‘मैं नहीं जानता यह कैसे हुआ।...पर मैं जानता हूं यह हुआ।...मेरी कल्पना मेरा साथ छोड़ देती है और यह मुझे दु:ख से भर देता है।’
‘जल्दी-जल्दी’, ‘दुका’ (दुकान), ‘शरबत’, ‘आना’, ‘रुपी’, ‘मिहराब’, ‘रमदान’, ‘समोसा’, ‘जुमा’ जैसे शब्द भारतीय पाठकों को अपनेपन का बोध कराते हैं। उपन्यास में सोहिली, अरबी, हिन्दी, गुजराती के शब्द हैं। उदासी से भरपूर उपन्यास ‘डेजर्शन’ एकाध छींटा हास्य का भी बिखेरता है जैसे हड्डी जोड़ने वाले याहया की कहानी जिसे पीठ पीछे ‘लेगब्रेकर’ पुकारा जाता है। ऑन्ट (मौसी) मरियम चार पति चाहती है ताकि एक से मन भर जाए तो दूसरे को बुला सके।
बांध के रखने वाली कहानी
तीन पीढ़ियों को समेटती कहानी एक बार शुरू करने पर आप समाप्त किए बिना छोड़ नहीं सकते हैं। स्त्री के प्रति सब समाज एक जैसा नजरिया रखते हैं। लोग जमीला को बुरी स्त्री मानते हैं। आत्मकथात्मक उपन्यास ‘डेजर्शन’ मे आए प्रेम को खुद उपन्यासकार ‘द इम्पीरियल रोमांस’ की संज्ञा देता है। कहानी अफ्रीकी जमीन पर चलती है, वास्तव में कभी समाप्त नहीं होती है। इस उपन्यास के विषय में ‘द न्यू यॉर्कर’ ने लिखा है, ‘अफ्रीका के इतिहास, अलगाव और हानि पर प्रगाढ़ चिंतन।’
इस उपन्यास में पात्र डायरी रखते हैं। रशीद-अमीन की बहन फरीदा जिसे सब बेवकूफ मानते थे उसका काव्य संकलन प्रकाशित होता है। उपन्यास पत्र में भी कहानी को आगे बढ़ाता है। हसनअली का आतिथ्य सत्कार मन को छूता है। उपन्यास जंजीबार में बोहरा गुजराती, गोअन, पुर्तगाली, अरब, ओमानी, ब्रिटिश, सोमाली आदि विभिन्न समुदायों का समागम दिखाता है।
दो वर्जित त्रासद प्रेम और उनका प्रेमियों के परिवार पर असर को दिखाता उपन्यास ‘डेजर्शन’ साहित्य की शक्ति का बेजोड़ उदाहरण है। अब्दुलरजाक गुरनाह मनुष्य की कहानी लिख रहे हैं। गंभीरता से रचे गए गुरनाह के उपन्यास में परित्याग कई रूपों में आता है। इसका पहला भाग उपनिवेश काल में पूर्वी अफ्रीका को उपनिवेशियों की नजर से दिखाता है। दूसरा भाग रशीद, अमीन, फरीदा, जमीला की कहानी कहता है। तीसरा भाग इन कहानियों को जोड़ कर मुकम्मल बनाता है।
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