मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव नतीजे के डेढ़ महीने बाद भी हिंसा की खबरें आ रही हैं।
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ममता सरकार और अदालत
अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास 541 शिकायतें दर्ज हुई है, जबकि राज्य मानवाधिकार आयोग के पास एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है। चुनाव के बाद भी हिंसा जारी रहना चिंताजनक है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव नतीजे के डेढ़ महीने बाद भी हिंसा की खबरें आ रही हैं। पुलिस के खिलाफ ऐसे मामले दर्ज नहीं करने के आरोप लग रहे हैं। जो मामले दर्ज हुए हैं उनकी भी ठीक से जांच नहीं हो रही है। लेकिन सरकार ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।
हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह कहा था कि राज्य ने चुनाव के बाद की हिंसा से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि हिंसा के ऐसे मामलों में सरकार को अपनी मर्जी के मुताबिक काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को याद दिलाया था कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना और लोगों में विश्वास पैदा करना उनका कर्तव्य है। उस पीठ में न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी, हरीश टंडन, सौमेन सेन और सुब्रत तालुकदार भी शामिल हैं।
इससे पहले बीते सप्ताह राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार चुनाव के बाद की हिंसा के कारण लोगों की पीड़ा के प्रति निष्क्रिय और उदासीन बनी हुई है। इस बीच, सोमवार को सात दिनों के उत्तर बंगाल दौरे पर पहुंचे राज्यपाल ने कहा है कि चुनाव के बाद ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा जारी है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति और आदिवासी भी इसका शिकार हो रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
राज्यपाल ने हाल में हिंसा के मुद्दे पर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा कई अन्य नेताओं से भी मुलाकात कर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
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