भारतीय शास्त्रीय संगीत के युगपुरुष, शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां देश के सबसे सम्मानित संगीत व्यक्तित्वों में एक रहे हैं। बिहार के एक छोटे-से कस्बे डुमरांव में जन्मे खां साहब की हर सांस शहनाई के सुरों को समर्पित थी। वे बनारस को अपनी कर्मभूमि बनाकर जीवन भर संगीत में मुक्ति की तलाश करते रहे।
यह तो पता नहीं कि शहनाई के सुर उन्हें बाबा विश्वनाथ की शरण में ले गए या नहीं, लेकिन हमारे दिलों की गहराई में तो वे कब के पहुंच गए थे। उनकी सादगी, विनम्रता, बच्चों-सी निश्छल मुस्कान, फ़कीराना ज़िंदगी और सुरों के प्रति उनकी दीवानगी आने वाली संगीत-पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी। उनकी पुण्यतिथि (21 अगस्त) पर मरहूम उस्ताद को खिराज़-ए-अक़ीदत !
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।