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टोक्यो ओलंपिक और पाकिस्तान : सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों का उड़ रहा मजाक, निशाने पर इमरान

सार

पाकिस्तान ने 29 साल पहले बार्सिलोना ओलंपिक गेम्स में हॉकी में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद से उसकी झोली खाली चल रही है, लेकिन टोक्यो ओलंपिक गेम्स में जैवलिन थ्रो में पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम फाइनल में क्या पहुंचा, पाकिस्तान ने पुरानी आदत के चलते गोल्ड पदकधारी भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा से अरशद की तुलना शुरू कर दी।

यही नहीं पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन को कमतर तक बताया जाता रहा। हालांकि, मात्र 22 सदस्यीय दल, जिसमें 10 खिलाड़ी थे, ओलंपिक गेम्स भेजने वाले पाकिस्तान की कालू करतूतों की परतें खुलने लगी हैं। आखिर क्या चल रहा है पाकिस्तानी मीडिया में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार विनोद पाठक..! 
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पाकिस्तान ने 29 साल पहले बार्सिलोना ओलंपिक गेम्स में हॉकी में कांस्य पदक जीता था। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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14 अगस्त को पाकिस्तान अपना 75वां स्थापना दिवस मनाएगा। अपनी स्थापना से यदि पाकिस्तान ने कोई एक काम किया है तो वो है भारत के साथ मुकाबला। शुरुआत से पाकिस्तानी नेता और सेना जनता को भारत से तुलना का झूठा पाठ पढ़ाती आ रही है। ताजा उदाहरण ओलंपिक गेम्स का है।

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दरअसल, पाकिस्तान ने 29 साल पहले बार्सिलोना ओलंपिक गेम्स में हॉकी में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद से उसकी झोली खाली चल रही है, लेकिन टोक्यो ओलंपिक गेम्स में जैवलिन थ्रो में पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम फाइनल में क्या पहुंचा, पाकिस्तान ने पुरानी आदत के चलते गोल्ड पदकधारी भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा से अरशद की तुलना शुरू कर दी।



यही नहीं पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन को कमतर तक बताया जाता रहा। हालांकि, मात्र 22 सदस्यीय दल, जिसमें 10 खिलाड़ी थे, ओलंपिक गेम्स भेजने वाले पाकिस्तान की कालू करतूतों की परतें खुलने लगी हैं।

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पाकिस्तानी मीडिया में इन दिनों

टोक्यो ओलंपिक गोम्स में भाग लेने वाले एथलीट अरशद नदीम और वेटलिफ्टर तल्हा तालिब इनदिनों पाकिस्तान में हीरो बने हुए हैं। नदीम ने जैवलिन थ्रो के फाइनल मुकाबले में 5वां स्थान प्राप्त किया तो 21 वर्षीय तालिब 67 किलोग्राम वर्ग में 5वें नंबर पर रहे। ये और बात है कि दोनों को पाकिस्तान ओलंपिक एसोसिएशन से कोई सहयोग नहीं मिला। दोनों व्यक्तिगत स्तर पर फाइनल तक पहुंचे।

अरशद और तालिब के अलावा 8 और खिलाड़ी टोक्यो गए थे, जिनमें महिला एथलीट नजीमा परवीन भी शामिल थी। नजीमा क्वालिफाई नहीं कर सकी और 200 मीटर रेस में अंतिम आईं। उसने 28 सेकेंड से अधिक समय में रेस पूरी की, जिसका पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर जमकर उपहास उड़ाया जा रहा है।
 

पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन को कमतर तक बताया जाता रहा। - फोटो : सोशल मीडिया

ओलंपिक एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान की हालत 

नजीमा के टोक्यो ओलंपिक सफर की कहानी बेहद दिलचस्प है। पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन ने साल 2019 में सिफारिश भेजी थी कि नजीमा को ओलंपिक गेम्स में भेजा जा सकता है। सिफारिश को ओलंपिक एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (पीओए) ने अपने पास रख लिया। नजीमा का 200 मीटर में 23.69 सेकेंड का नेशनल रिकॉर्ड है।

ओलंपिक गेम्स में जाने से पहले नजीमा ने निकाह कर घर बसा लिया। जब ओलंपिक गेम्स में जाने का समय आया तो पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन ने पीओए को नजीमा को न भेजने के लिए लिखा, क्योंकि नजीमा गायब थी। वो न कैंप में आईं न फिटनेस टेस्ट देने। फिर भी नजीमा टोक्यो ओलंपिक में ट्रैक तक पहुंच गईं।
 
कारण- बड़ा दिलचस्प है। पीओए ने नजीमा को केवल इसलिए भेजा, क्योंकि वो खिलाड़ी नहीं अपनी सेटिंग के कोच को टोक्यो की सरकारी खर्चे पर सैर कराना चाहता था। कोच का नाम पाकिस्तान में किसी को सही ढंग से न तो पता है और न वो फेडरेशन से जुड़ी हुई है। कयास यही है कि वो नजीमा की कोच किसी पूर्व या वर्तमान सैन्य अधिकारी की पत्नी या रिश्तेदार है। कुछ ऐसा ही हाल बैडमिंटन खिलाड़ी महूर शहजाद का भी है। महूर पर भी सेटिंग से ओलंपिक का टिकट लेना का आरोप है।

ओलंपिक गेम्स में एकबार फिर बेहद निराशाजनक प्रदर्शन पर पाकिस्तान के स्पोर्ट्समैन प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा-
 
स्पोर्ट्स ही ऐसा फील्ड है, जिसमें उनकी ट्रिपल पी.एचडी है। अब अपने बचे दो साल के कार्यकाल में वो स्पोर्ट्स पर विशेष ध्यान देंगे।

हालांकि, पाकिस्तान की जनता और खेलों से जुड़े लोग इमरान के इस बयान की खिल्ली उड़ा रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान के प्रिय खेल क्रिकेट, जिसके इमरान खान कप्तान रहे हैं, में देश का प्रदर्शन खराब चल रहा है।
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पाकिस्तान की जनता और खेलों से जुड़े लोग इमरान के इस बयान की खिल्ली उड़ा रहे हैं। - फोटो : twitter.com/ImranKhanPTI

पाकिस्तान में लोकतंत्र और सेना  

पाकिस्तान स्थापना के पहले दिन से यहां सेना बेहद मजबूत रही है। देश में कई बार मार्शल लॉ लग चुका है। आज भी इमरान खान की असली लगाम जनरल कमर बाजवा के हाथों में है। बैंकिंग से लेकर खेलों तक, हर जगह पूर्व सैन्य अधिकारी काबिज हैं। पीओए में भी जरनल सैयद आरिफ हसन और अकरम साही के बीच विवाद चल रहा है।

कमाल की बात यह है कि साही को पाकिस्तानी सेना का समर्थन बताया जाता है, जबकि जनरल हसन 2016 में लगातार तीसरी बार पीओए के चेयरमैन चुने गए। जनरल हसन से पहले सैयद वाजिद अली चेयरमैन थे, जो 28 साल बाद कुर्सी से तब हटे, जब उनकी उम्र 91 साल की हो गई। भ्रष्ट पाक सेना के जनरलों की करतूतें ऐसी हैं कि पाकिस्तान में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए पैसे नहीं हैं। क्रिकेट को छोड़ दिया जाए तो बाकी खेलों के खिलाड़ियों को अच्छे जूते तक नसीब नहीं हो रहे।  

ओलंपिक गेम्स में भले पाकिस्तान 29 साल से खाता नहीं खोल पाया है, लेकिन एक खेल भी ऐसा है, जिसमें पाकिस्तान साल दर साल गोल्ड जीतता आ रहा है। यह खेल है आतंकवाद का। भारत के खिलाफ 75 साल से साजिशें रचते आ रहे पाकिस्तान के अपने किसी पड़ोसी से दोस्ताना संबंध नहीं हैं। 



इनदिनों अफगानिस्तान में तालिबान को सैन्य, वित्तीय और सभी तरह का समर्थन देकर पाकिस्तान विश्व समुदाय के निशान पर है। अफगानिस्तान अपने राजनायिकों को पाकिस्तान से बुला चुका है। ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंध सुखद नहीं हैं। केवल चीन से पाकिस्तान के संबंध बेहतर हैं। वो भी इसलिए, क्योंकि चीन ने उसे भारी-भरकम कर्ज दे रखा है और खरबों रुपए का निवेश किया हुआ है।

अच्छा तो यही होगा कि पाकिस्तान आतंक के खेल के बजाय क्रिकेट, जैवलिन, बैडमिनटन, वेटलिफ्टिंग जैसे असली खेलों पर ध्यान लगाए। आतंकियों की ट्रेनिंग पर करोड़ों-अरबों रुपए खर्च करने के बजाय इन खेलों में निवेश करे।

प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी ट्रिपल पी.एचडी का कमाल यहां दिखाएं, वरना 29 साल नहीं, 129 साल तक भी पाकिस्तान की पदक तालिका यूं सूनी रहेगी। सैन्य अधिकारियों की बीवियां ओलंपिक गेम्स में पिकनिक मनाने जाती रहेंगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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