पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन को कमतर तक बताया जाता रहा।
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ओलंपिक एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान की हालत
नजीमा के टोक्यो ओलंपिक सफर की कहानी बेहद दिलचस्प है। पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन ने साल 2019 में सिफारिश भेजी थी कि नजीमा को ओलंपिक गेम्स में भेजा जा सकता है। सिफारिश को ओलंपिक एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (पीओए) ने अपने पास रख लिया। नजीमा का 200 मीटर में 23.69 सेकेंड का नेशनल रिकॉर्ड है।
ओलंपिक गेम्स में जाने से पहले नजीमा ने निकाह कर घर बसा लिया। जब ओलंपिक गेम्स में जाने का समय आया तो पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन ने पीओए को नजीमा को न भेजने के लिए लिखा, क्योंकि नजीमा गायब थी। वो न कैंप में आईं न फिटनेस टेस्ट देने। फिर भी नजीमा टोक्यो ओलंपिक में ट्रैक तक पहुंच गईं।
कारण- बड़ा दिलचस्प है। पीओए ने नजीमा को केवल इसलिए भेजा, क्योंकि वो खिलाड़ी नहीं अपनी सेटिंग के कोच को टोक्यो की सरकारी खर्चे पर सैर कराना चाहता था। कोच का नाम पाकिस्तान में किसी को सही ढंग से न तो पता है और न वो फेडरेशन से जुड़ी हुई है। कयास यही है कि वो नजीमा की कोच किसी पूर्व या वर्तमान सैन्य अधिकारी की पत्नी या रिश्तेदार है। कुछ ऐसा ही हाल बैडमिंटन खिलाड़ी महूर शहजाद का भी है। महूर पर भी सेटिंग से ओलंपिक का टिकट लेना का आरोप है।
ओलंपिक गेम्स में एकबार फिर बेहद निराशाजनक प्रदर्शन पर पाकिस्तान के स्पोर्ट्समैन प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा-
स्पोर्ट्स ही ऐसा फील्ड है, जिसमें उनकी ट्रिपल पी.एचडी है। अब अपने बचे दो साल के कार्यकाल में वो स्पोर्ट्स पर विशेष ध्यान देंगे।
हालांकि, पाकिस्तान की जनता और खेलों से जुड़े लोग इमरान के इस बयान की खिल्ली उड़ा रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान के प्रिय खेल क्रिकेट, जिसके इमरान खान कप्तान रहे हैं, में देश का प्रदर्शन खराब चल रहा है।
पाकिस्तान की जनता और खेलों से जुड़े लोग इमरान के इस बयान की खिल्ली उड़ा रहे हैं।
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पाकिस्तान में लोकतंत्र और सेना
पाकिस्तान स्थापना के पहले दिन से यहां सेना बेहद मजबूत रही है। देश में कई बार मार्शल लॉ लग चुका है। आज भी इमरान खान की असली लगाम जनरल कमर बाजवा के हाथों में है। बैंकिंग से लेकर खेलों तक, हर जगह पूर्व सैन्य अधिकारी काबिज हैं। पीओए में भी जरनल सैयद आरिफ हसन और अकरम साही के बीच विवाद चल रहा है।
कमाल की बात यह है कि साही को पाकिस्तानी सेना का समर्थन बताया जाता है, जबकि जनरल हसन 2016 में लगातार तीसरी बार पीओए के चेयरमैन चुने गए। जनरल हसन से पहले सैयद वाजिद अली चेयरमैन थे, जो 28 साल बाद कुर्सी से तब हटे, जब उनकी उम्र 91 साल की हो गई। भ्रष्ट पाक सेना के जनरलों की करतूतें ऐसी हैं कि पाकिस्तान में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए पैसे नहीं हैं। क्रिकेट को छोड़ दिया जाए तो बाकी खेलों के खिलाड़ियों को अच्छे जूते तक नसीब नहीं हो रहे।
ओलंपिक गेम्स में भले पाकिस्तान 29 साल से खाता नहीं खोल पाया है, लेकिन एक खेल भी ऐसा है, जिसमें पाकिस्तान साल दर साल गोल्ड जीतता आ रहा है। यह खेल है आतंकवाद का। भारत के खिलाफ 75 साल से साजिशें रचते आ रहे पाकिस्तान के अपने किसी पड़ोसी से दोस्ताना संबंध नहीं हैं।
इनदिनों अफगानिस्तान में तालिबान को सैन्य, वित्तीय और सभी तरह का समर्थन देकर पाकिस्तान विश्व समुदाय के निशान पर है। अफगानिस्तान अपने राजनायिकों को पाकिस्तान से बुला चुका है। ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंध सुखद नहीं हैं। केवल चीन से पाकिस्तान के संबंध बेहतर हैं। वो भी इसलिए, क्योंकि चीन ने उसे भारी-भरकम कर्ज दे रखा है और खरबों रुपए का निवेश किया हुआ है।
अच्छा तो यही होगा कि पाकिस्तान आतंक के खेल के बजाय क्रिकेट, जैवलिन, बैडमिनटन, वेटलिफ्टिंग जैसे असली खेलों पर ध्यान लगाए। आतंकियों की ट्रेनिंग पर करोड़ों-अरबों रुपए खर्च करने के बजाय इन खेलों में निवेश करे।
प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी ट्रिपल पी.एचडी का कमाल यहां दिखाएं, वरना 29 साल नहीं, 129 साल तक भी पाकिस्तान की पदक तालिका यूं सूनी रहेगी। सैन्य अधिकारियों की बीवियां ओलंपिक गेम्स में पिकनिक मनाने जाती रहेंगी।
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